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पंचों को 300 रुपये, सरपंचों को 1000 रुपये मानदेय; सुरक्षा कानून व बीमा की माँग

बलरामपुर, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)।
पंचायती कार्यों में लगे जनप्रतिनिधियों के मानदेय व सुरक्षा को लेकर फिर से उठी आवाज़। पंचायत जनप्रतिनिधि संघ ने पंचों और सरपंचों के मानदेय में वृद्धि के साथ उनके लिए सुरक्षा कानून और बीमा की व्यवस्था करने की मांग रखी।

संघ के प्रदेश संयोजक अनिल कुमार के नेतृत्व में आज शाम प्रतिनिधियों ने अपर कलेक्टर अनिल सिदार को ज्ञापन सौंपा। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार माँगों पर गंभीरता नहीं दिखाती, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

अनिल कुमार ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पंचों को प्रतिदिन लगभग ₹16 और सरपंचों को ₹133 मानदेय मिलता है, जबकि मैनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को लगभग ₹300 प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। अतः पंचों के मानदेय को मैनरेगा मजदूरों के बराबर यानी ₹300 प्रतिदिन और सरपंचों को ₹1000 प्रतिदिन किया जाना चाहिए। वह कहते हैं कि उचित मानदेय मिलने से जनप्रतिनिधि आर्थिक चिंता से मुक्त होकर गांव के विकास पर बेहतर काम कर पाएंगे।

संघ ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। अनिल कुमार के अनुसार कई जगह सरपंचों और पंचों के साथ मारपीट तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं। सुरक्षा से जुड़े विशेष कानून के अभाव में जनप्रतिनिधियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बीमा की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और किसी दुर्घटना या अप्रिय घटना में आर्थिक सहायता का ठोस प्रबंध नहीं है। संघ ने सरकार से प्रत्येक पंचायत प्रतिनिधि को ₹10 लाख तक का सुरक्षा बीमा और पंचायत सुरक्षा कानून लागू करने की माँग की।

पंचायतों के विकास कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर भी संघ ने सवाल उठाए। वह कहते हैं कि ग्राम पंचायतों को निर्माण एजेंसी माना जाता है, परंतु अधिकांश निर्माण कार्य ठेके के माध्यम से कराए जा रहे हैं, जिससे पंचायतों की भूमिका सीमित हो रही है। संघ की माँग है कि ₹50 लाख तक के निर्माण कार्य कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी जाए और प्रत्येक ग्राम पंचायत को ₹1 करोड़ का विकास बजट और ग्रामसभा के लिए हॉल व सामुदायिक भवन बनवाने का प्रबंध हो।

अनिल कुमार ने बताया कि संघ ने अभी तक ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है और यदि माँगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर के पंचायत जनप्रतिनिधियों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघ मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री से भी मुलाकात कर इस मुद्दे को सामने रखेगा।

अपर कलेक्टर अनिल सिदार ने कहा कि संघ से प्राप्त ज्ञापन वरिष्ठ कार्यालय को भेजा जाएगा और निर्णय शासन स्तर पर नीतिगत प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।

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