
जगदलपुर, 05 नवंबर (प्रेस ब्यूरो)। बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण इकाई, बस्तर द्वारा विद्यालयों में लगातार बाल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इस संदर्भ में आज बुधवार को शासकीय हाई स्कूल हटकचोरा एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, भैरमगंज, जगदलपुर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र‑छात्राओं तथा शिक्षकों ने बाल विवाह को रोकने तथा बाल अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लेते हुए ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ की शपथ ली।
कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण इकाई की परामर्शदाता श्रीमती रंजीता देवांगन एवं आउटरीच वर्कर (ओआरडब्ल्यू) श्रीमती ललिता बघेल ने विद्यार्थियों से संवाद स्थापित कर उन्हें बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मिशन वात्सल्य योजना के उद्देश्यों को समझाते हुए बताया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा, सम्मान और विकास के समान अवसर मिलना आवश्यक है। बच्चों को गुड टच‑बैड टच के माध्यम से सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाया गया। साथ ही उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों, बाल विवाह के दुष्परिणामों, बाल श्रम की रोकथाम तथा बेटी बचाओ‑बेटी पढ़ाओ अभियान के महत्व पर चर्चा की। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार की परेशानी, शोषण अथवा दुर्व्यवहार की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या बाल संरक्षण इकाई, तथा चाइल्ड लाइन 1098 से संपर्क करना चाहिए।
कार्यक्रम में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और उसके बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रति भी चेतावनी दी गई। विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपने आस‑पास के बच्चों को भी गलत आदतों से बचाने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रकार बाल संरक्षण अभियान ने बच्चों को सशक्त बनाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
