नई दिल्ली। चीन के अधिकारियों ने पूर्वी तिब्बत के ऐतिहासिक दजा सेरशुल मठ में भिक्षुओं के 200 से अधिक घरों को गिराने की कार्रवाई शुरू की है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के अनुसार, 25-26 अक्टूबर को शुरू हुए इस अभियान के दौरान क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। तिब्बती शिक्षण संस्थानों को बंद किए जाने की भी खबर है। इस कार्रवाई से तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
25-26 अक्टूबर को शुरू हुआ अभियान
रेडियो फ्री एशिया (आरएफए) ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के हवाले से बताया कि तोड़फोड़ की कार्रवाई कार्जे क्षेत्र की सेरशुल काउंटी स्थित दजा सेरशुल मठ में शुरू की गई। सीटीए के मुताबिक, 25 और 26 अक्टूबर को इस अभियान के बीच अधिकारियों ने क्षेत्र में बैठक भी की।
इसके बाद इलाके में इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई। हालांकि, इंटरनेट बंद किए जाने के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
तिब्बती शिक्षण संस्थान बंद होने की खबर
रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में तिब्बती शिक्षण संस्थानों को भी बंद किया गया है। ये संस्थान तिब्बती भाषा की शिक्षा देने के साथ पारंपरिक सांस्कृतिक ज्ञान और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराते थे। खास तौर पर खानाबदोश परिवारों के बच्चों के लिए इन संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है।
इन संस्थानों के बंद होने से स्थानीय बच्चों की शिक्षा और तिब्बती भाषा-संस्कृति से जुड़े ज्ञान के संरक्षण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मठों पर आदेश मानने का दबाव
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अनुसार, क्षेत्र के मठों पर अधिकारियों के आदेशों का पालन करने के लिए दबाव बनाया गया। आदेश नहीं मानने की स्थिति में मठों को बंद करने और धार्मिक नेताओं को हिरासत में लेने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
सीटीए ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए इसे तिब्बत की धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। हालांकि, इन आरोपों पर चीनी अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
