शाजापुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, विशेषकर कृष्णमृग और नीलगाय से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसी उद्देश्य से शाजापुर जिले में बोमा पद्धति से वन्यजीवों के रेस्क्यू और स्थानांतरण का अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर पहुंचकर हेलीकॉप्टर से प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के तहत संचालित रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के जरिए कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित पकड़ने की प्रक्रिया का भी निरीक्षण किया।
31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि शाजापुर जिले में किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष बोमा पद्धति से कृष्णमृग और नीलगायों के रेस्क्यू की शुरुआत की गई थी। दक्षिण अफ्रीका की विशेष टीम की सहायता से वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के अंतर्गत यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक शाजापुर जिले से लगभग 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।
11 ट्रकों से वन क्षेत्रों में पहुंचाए जा रहे वन्यजीव
रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम भी किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू अभियान के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि उन्हें पकड़ने और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की चोट न पहुंचे।
दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला अभियान
डॉ. यादव ने कहा कि हेलीकॉप्टर की सहायता से बोमा पद्धति पर आधारित वन्यजीव रेस्क्यू का यह अभियान दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इससे वन्यजीवों के संरक्षण के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि परियोजना की सफलता से देश के अन्य राज्यों को भी इस तरह की पहल करने की प्रेरणा मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अभियान के संचालन, वन्यजीवों के सुरक्षित स्थानांतरण और आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक टीम के सदस्यों के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया।
