
भोपाल, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विविधतापूर्ण भारतीय संस्कृति, विशेषकर दक्षिण की परम्पराएँ, सभी को रोमांचित करती हैं और हमारी सांस्कृतिक कलाएं व परंपराएं जीवन में उत्साह व उमंग का संचार करती हैं।
शुक्रवार देर शाम, आंध्र प्रदेश प्रवास के दौरान विजयवाड़ा उत्सव में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री यादव ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार और टूरिज्म विभाग की ओर से गर्मजोशी भरा स्वागत मिला। कार्यक्रम का मुख्य थीम “दक्षिण का वैभव” था, जहाँ विभिन्न कलात्मक समूहों ने मनोहारी नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं।

मुख्यमंत्री ने माँ कनक दुर्गा व भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी के चरणों में नमन किया और कहा, “विजयवाड़ा उत्सव का यह द्वितीय वर्ष है, नवरात्रि का पर्व चल रहा है। माँ दुर्गा हमें सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और आज भगवान इंद्र भी इस महोत्सव को आशीर्वाद दे रहे हैं। बरसात की बूँदें उत्सव की उमंग को और बढ़ा रही हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि माँ कृष्णा नदी के किनारे स्थित विजयवाड़ा “विजय की धरती” है और मध्य प्रदेश व आंध्र प्रदेश के लोगों की ओर से “विजय” की कामना की। उन्होंने आंध्र प्रदेश के नागरिकों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि पूरे देश में इस उत्सव का वैभव निरन्तर बढ़ रहा है।

उत्सव में 4‑5 हज़ार कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक नृत्य व कलाओं की प्रस्तुति दे रहे थे। विजयवाड़ा का हीरा खनन इतिहास भी उल्लेखनीय है; यहाँ से निकला प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा ब्रिटिश शासकों तक गया और अब भारत सरकार उसे वापस लाने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा, यहाँ का मैंगो मार्केट राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित दर्शकों एवं श्रद्धालुओं को उज्जैन में बाबा महाकाल एवं ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए आमंत्रित किया, साथ ही मध्य प्रदेश के तीन स्थानों पर लुप्त हुए चीतों को पुनर्स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए।
उसी दिन, अमरावती, गुंटूर जिले में स्थित इंद्रकीलाद्रि पर्वत के शिखर पर स्थित श्री दुर्गा मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में उन्होंने माँ कनक दुर्गा का दर्शन किया और शारदीय नवरात्रि महोत्सव‑2026 के विशेष पूजन में भाग लिया।
