
Dharmadi, 16 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ग्राम घीकुड़िया में सोंढुर नदी के रेतीले तट पर रिवर कैंपिंग और ग्रामीण पर्यटन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं, युवतियों, बच्चों, बुज़ुर्गों और पर्यटन विशेषज्ञों ने भाग लेकर प्रकृति के बीच कैंपिंग का अनुभव किया। उद्देश्य था स्थानीय समुदाय को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना।

रिवर कैंपिंग के दौरान, गाँव में प्रचलित ददरिया, राउत नाचा, बाँसगीत और मानस पाठ जैसी लोकविधाओं को पर्यटकों के समक्ष प्रस्तुत करने पर चर्चा हुई। बांसुरी वादन और पारंपरिक बाँसगीत की मधुर प्रस्तुतियाँ प्रतिभागियों को आकर्षित करती रहीं। टेंट लगाकर रात भर सितारों भरे आसमान के नीचे कैंपिंग की व्यवस्था की गई, जिससे ग्रामीणों को आवास, भोजन और अतिथि सत्कार जैसी सेवाओं का विकास करने के अवसर मिले।

युवतियों ने पर्यटन गतिविधियों में उत्साह दिखाते हुए स्थानीय स्तर पर सेवाएँ उपलब्ध कराने की इच्छा जताई। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाओं और पर्यटन विशेषज्ञों ने पारंपरिक भोजन, नाश्ता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और कैंपिंग से जुड़ी सेवाओं के माध्यम से आय अर्जित करने के संभावनाओं पर चर्चा की। यह ज़ोर दिया गया कि पर्यटन का संचालन स्थानीय समुदाय की भागीदारी से किया जाए ताकि आर्थिक लाभ का हिस्सा ग्रामीणों तक पहुंचे।

अगले दिन सुबह प्रतिभागियों ने पक्षी अवलोकन किया। स्थानीय जानकारी के अनुसार घीकुड़िया में सौ से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र प्रकृति पर्यटन और बर्ड वॉचिंग के लिए उपयुक्त है। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण कमार जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली और उनके मच्छर पकड़ने की विधि ‘रेड़ी बांधना’ के बारे में सीखना रहा।
समग्र रूप से, कार्यक्रम ने ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को उजागर किया, जिसमें सोंढुर नदी का सौंदर्य, पक्षियों की विविधता, कमार जनजाति की परंपराएँ, स्थानीय लोककलाएँ और पारंपरिक व्यंजन सम्मिलित हैं। रिवर कैंपिंग, बर्ड वॉचिंग, लोकसंगीत और ग्रामीण जीवन से जुड़ी गतिविधियों से स्थानीय परिवारों के लिए आय के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं। साथ ही, नदी की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान देना अनिवार्य है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और पर्यावरण‑स्नेही दृष्टिकोण के साथ, घीकुड़िया सोंढुर नदी के तट पर प्रकृति, संस्कृति और जनजातीय परंपराओं के संगम से एक आकर्षक ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बना सकता है।
