Saturday, March 7खबर जो असर करे |
Shadow

मछुआरों ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत विशाल नाव रैली निकाली

बड़वानी, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में नर्मदा बचाओ आंदोलन के अंतर्गत नर्मदा घाटी के विस्थापित मछुआरों ने सोमवार को अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग करते हुए नर्मदा नदी में एक विशाल नाव रैली आयोजित की। इस रैली का नेतृत्व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने किया, जिसमें 30 से अधिक नावों पर सवार सैकड़ों मछुआरा परिवार शामिल हुए। रैली कसरावद से राजघाट तक आयोजित की गई।

नाव रैली के माध्यम से मछुआरों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान उनकी वर्षों से लंबित मांगों की ओर आकर्षित किया। रैली के समापन के बाद मछुआरा संगठनों ने कलेक्टर बड़वानी को 10 सूत्रीय मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

नर्मदा घाटी के मछुआरे विस्थापन के सबसे बड़े पीड़ित हैं, ऐसा कहना मेधा पाटकर ने किया। उन्होंने कहा कि दशकों बाद भी मछुआरों को उनके कानूनी अधिकार नहीं मिले हैं। पाटकर ने चेतावनी दी कि यदि शासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और तेज किया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरदार सरोवर अंतरराज्यीय परियोजना से जुड़े सभी विषयों पर उसी के अनुसार कार्रवाई अनिवार्य है। यह फैसला 18 अक्टूबर 2000 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के तहत कानूनन मान्य है।

आंदोलनकारियों ने जलाशय में बढ़ते प्रदूषण, अवैध रेत खनन, क्रूज संचालन और जलस्तर में गिरावट से मछली पकड़ने पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई। साथ ही, पुलिस-प्रशासन द्वारा हो रहे कथित उत्पीड़न के मामलों में त्वरित कार्रवाई की भी मांग की। इस नाव रैली और जल भरो आंदोलन में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों से बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार शामिल हुए।

मछुआरों की 10 प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
1. सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित मछुआरों को नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले अनुसार पूर्ण अधिकार प्रदान किए जाएं।
2. नर्मदा माता मत्स्य सहकारी उत्पादन एवं विपणन संघ का शीघ्र पंजीकरण किया जाए।
3. विस्थापित मछुआरों को संपूर्ण पुनर्वास लाभ प्रदान किया जाए।
4. प्रभावित परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5. मछुआरों की आजीविका की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
6. सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य व्यवसाय सहकारी समितियों को सौंपा जाए।
7. मत्स्याखेट में ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए।
8. मछुआरों को किसान का दर्जा दिया जाए।
9. मछुआरों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) की सुविधा दी जाए।
10. मत्स्याखेट की बंद अवधि में आर्थिक सहायता राशि बढ़ाई जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *