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Day: October 12, 2025

महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से मानवता को दिया अनुपम उपहार : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से मानवता को दिया अनुपम उपहार : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 अक्टूबर।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के चरित्र को ‘रामायण’ के रूप में मानवता को एक अमूल्य उपहार दिया है। रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जिसमें समरसता, करुणा और समानता का जीवंत संदेश निहित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन से यह दिखाया कि ईश्वर की दृष्टि में सभी समान हैं — उन्होंने निषादराज से मित्रता की, शबरी के प्रेमपूर्वक दिए बेर खाए और वानर सेना को अपने परिवार की तरह अपनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को भोपाल के मानस भवन में आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती प्रकटोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘समरसता सम्मेलन’ में बोल रहे थे। उन्होंने राज्यसभा सांसद एवं श्री क्षेत्र वाल्मीकि धाम, उज्जैन के पीठाधीश्वर बालयोगी उमेशनाथ महाराज के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कह...
दो बूंद जिंदगी की, दो बूंद स्वस्थ राष्ट्र की: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ

दो बूंद जिंदगी की, दो बूंद स्वस्थ राष्ट्र की: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 अक्टूबर।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास से तीन दिवसीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने 12 छोटे बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो-दो बूंदें पिलाकर अभियान की शुरुआत की और सभी अभिभावकों से अपील की कि कोई भी बच्चा पोलियो रोधी खुराक से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पोलियो की दो बूंदें केवल बच्चों को सुरक्षित नहीं करतीं, बल्कि एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के निर्माण की नींव रखती हैं। उन्होंने कहा कि पोलियो जैसी बीमारी बच्चे को जीवनभर पराश्रित बना सकती है, इसलिए इसका उन्मूलन हर नागरिक का दायित्व है। तीन दिवसीय (12 से 14 अक्टूबर) अभियान के तहत प्रदेश के 18 चयनित जिलों में 39 लाख 19 हजार से अधिक बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई जाएगी। इस कार्य में 64 हजार से अधिक वैक्सीनेटर्स और 24 हजार से अधिक पल्स पोलियो बूथ लगाए गए हैं। स...
पुतुल समारोह के समापन पर भोपाल में मुक्ताकाश मंच पर होगा नाट्य ‘सीता हरण’ का प्रदर्शन

पुतुल समारोह के समापन पर भोपाल में मुक्ताकाश मंच पर होगा नाट्य ‘सीता हरण’ का प्रदर्शन

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 अक्टूबर।मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय में चल रहा पुतुल समारोह आज रविवार को एक विशेष प्रस्तुति के साथ संपन्न होगा। समापन अवसर पर नई दिल्ली के प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार अशोक लाल और उनकी टीम रामायण पर आधारित पारंपरिक कठपुतली नाट्य ‘सीता हरण’ का मंचन करेंगे। यह कार्यक्रम शाम 6:30 बजे संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर आयोजित होगा। ‘सीता हरण’ की कहानी रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग को प्रस्तुत करती है, जिसमें रावण, माता सीता का हरण करता है और यह प्रसंग धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रतीक बन जाता है। इस कथा को लकड़ी की पुतलियों, पारंपरिक संगीत, संवाद और प्रकाश प्रभावों के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। अशोक लाल और उनकी टीम वर्षों से कठपुतली कला के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य कर रहे हैं। वे पारंपरिक शैली को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर दर्शकों को एक नया अनुभव प्रदान करते हैं। संगीत, प्रकाश और ...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध और अलौकिक अनुभव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंध और अलौकिक अनुभव

लेख
लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णु कांत चतुर्वेदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विजयादशमी के पावन पर्व पर अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी कर ली है। हम सब ने बहुत कुछ जाने-अनजाने में इस संस्था के कार्य और उनकी संरचना के बारे में सुना है या फिर स्वयं भी किसी न किसी रूप में अनुभव किया है। मेरा भी इस संगठन से जुडाव कुछ इसी प्रकार हुआ। मैं 31 मई 2011 को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुआ। तब तक, मैने इस संगठन के बारे में केवल अखबारों में, पत्रिकाओं में या फिर कभी किसी राजनीतिक चर्चाओं में सुना था। मैं अब यह कह सकता हूं कि एक ऐसा संगठन जिसने अपने आप को केवल मानवता और राष्ट्र को समर्पित कर दिया, मैं स्वयं सेना की नौकरी में कार्यान्वित होने के कारण इस संगठन के उत्कृष्ट कार्यो से अनभिज्ञ रहा। ऐसा भी नहीं, कि मैंने अपने सेना के सेवाकाल में, इस संगठन के कार्यों का अनुभव नहीं किया, लेकिन कभी ध्यान ही नह...
घोष केवल संगीत और वादन नहीं, यह साधना है

घोष केवल संगीत और वादन नहीं, यह साधना है

लेख
नितिन गर्गे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जब भी पथ संचलन निकलता है, तब घोष उसका सौंदर्य बढ़ाता है। संघ कार्य का यह शताब्दी वर्ष है। इन 100 वर्षों में जिस प्रकार संघ का क्रमिक विकास हुआ है, उसी प्रकार संघ के घोष का भी क्रमिक विकास हुआ है। दिसंबर, 1926 में जब संघ का पहला पथ संचलन निकला था, तब घोष में केवल एक आनक और एक शंख ही शामिल हुआ था। घोड़े पर चढ़कर पहले सरसेनापति मार्तंड राव जोग आगे चलते थे तथा पीछे बिगुल वादक एवं स्वयंसेवक संचलन करते थे। विगत 100 वर्षों में यह यात्रा घोष की बड़ी और समृद्ध इकाई तक पहुँच गई है। घोषदल की इकाई में पणव (बास ड्रम), आनक (साइड ड्रम), शंख, वंशी, झल्लरी (झांझ), ट्राइंगल (त्रिभुज ), नियंत्रण और संकेत के लिए घोषदंड शामिल रहता है। आरएसएस का मत है कि घोष केवल संगीत का माध्यम नहीं, बल्कि यह वीरता, पराक्रम और राष्ट्रनिर्माण की भावना का प्रतीक है। शंख, ढोल और रणभेर...
गहन चोट से शब्दों का अभाव

गहन चोट से शब्दों का अभाव

लेख
हृदयनारायण दीक्षित राष्ट्र स्तब्ध है। देश की सर्वोच्च न्यायपीठ के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंके जाने की घटना से जन गण मन आहत है। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने अब तक घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब उन्होंने कहा है कि, ”जो कुछ हुआ उससे बहुत स्तब्ध था।” मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उनके सहयोगी न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने इससे भिन्न राय प्रकट की है। यह अच्छी बात है कि मुख्य न्यायाधीश ने इसे एक भुला दिया गया अध्याय बताया है, लेकिन देश में इस घटना पर अच्छी खासी बहस है। भुइयां ने कहा है, “इस पर मेरी अपनी राय है। वह भारत के चीफ जस्टिस हैं। यह उच्चतर संस्था का अपमान है।” राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित इस घटना ने कई दिशाओं में नया सोचने की आवश्यकता प्रकट की है। घटना की गंभीरता का पता इसी बात से चलता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी घटना की न...
घुसपैठ का गहराता संकट, ग्वालियर की घटना से बड़ा सबक लेने की जरूरत

घुसपैठ का गहराता संकट, ग्वालियर की घटना से बड़ा सबक लेने की जरूरत

लेख
डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के ग्वालियर से हाल ही में सामने आया बांग्लादेशी नागरिकों का मामला एक पुलिस कार्रवाई भर नहीं है; यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और प्रशासनिक चौकसी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। महाराजपुरा एयरबेस जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास बिना वैध दस्तावेजों के बारह वर्षों तक आठ बांग्लादेशी नागरिकों का रहना इस ओर संकेत करता है कि अवैध विदेशी घुसपैठ सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रही, अब यह देश के भीतर गहराई तक फैल चुकी है। गुजरात में सबसे बड़ी कार्रवाई अप्रैल 2025 में हुई, जब सूरत और अहमदाबाद से हजारों संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पाया कि ये लोग वर्षों से फर्जी पहचान पत्रों और किरायेदारी के आधार पर रह रहे थे। हरियाणा के गुरुग्राम में भी सैकड़ों अवैध घुसपैठियों को पकड़ा गया, जिनमें बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे। ...
अंबिकापुर राजघराना: सरगुजा रियासत की संस्कृति, वीरता और जनसेवा का प्रतीक

अंबिकापुर राजघराना: सरगुजा रियासत की संस्कृति, वीरता और जनसेवा का प्रतीक

यात्रा, विशेष समाचार
अंबिकापुर, 12 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के उत्तर में स्थित सरगुजा जिला अपने गौरवशाली इतिहास और राजसी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। सरगुजा रियासत केवल एक शासन इकाई नहीं थी, बल्कि यह संस्कृति, साहस और प्रजा-सेवा की मिसाल मानी जाती है। यहां के शासक रघुवंशी वंश से संबंध रखते थे, जिन्हें भगवान श्रीराम का वंशज माना जाता है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि सरगुजा रियासत की स्थापना लगभग 1613 ईस्वी में हुई थी। प्रारंभिक शासकों में महाराज जयंतदेव और महाराज लक्ष्मणदेव का नाम उल्लेखनीय है। आने वाले वर्षों में यह रियासत छत्तीसगढ़ की प्रमुख और संगठित रियासतों में से एक बन गई। 20वीं सदी में सरगुजा का नाम महाराज रघुनाथ शरण सिंहदेव के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। वे दूरदर्शी, प्रजावत्सल और शिक्षा-प्रेमी शासक थे। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में तालाबों का निर्माण, विद्यालयों की स्थापना और कृषि सुधार पर वि...
धर्मांतरण और विभाजन की पीड़ा को उजागर करेगी फिल्म “शरणार्थी – द रिफ्यूजीज”, निर्देशन कर रहीं हैं संगीता दत्ता

धर्मांतरण और विभाजन की पीड़ा को उजागर करेगी फिल्म “शरणार्थी – द रिफ्यूजीज”, निर्देशन कर रहीं हैं संगीता दत्ता

विशेष समाचार
कोलकाता, 12 अक्टूबर।बंगाल के इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाली फिल्म "शरणार्थी – द रिफ्यूजीज" पर काम शुरू हो गया है। इसका निर्देशन डॉक्युमेंट्री फिल्मकार संगीता दत्ता कर रही हैं और इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं त्रिपुरा और मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथा लेखक तथागत राय। यह फिल्म तथागत राय की चर्चित पुस्तक "माय पीपल अपरूटेड" पर आधारित है, जिसमें धर्म के आधार पर हुए भारत विभाजन और पूर्वी बंगाल से हिंदू बंगालियों के जबरन विस्थापन की कहानी को चित्रित किया गया है। संगीता दत्ता के अनुसार फिल्म में तथागत राय के साथ दो अन्य प्रमुख पात्र हैं – जन्मजीत राय, जो असम के बांग्ला भाषी हिंदू शरणार्थियों से जुड़े रहे हैं, और दिनु दास, जो पूर्वी पाकिस्तान से पलायन कर भारत आए एक परिवार से हैं। यह तीनों पात्र विभाजन और रैडक्लिफ रेखा से जुड़ी ऐतिहासिक पीड़ा और विस्थापन की खोज में निकलते हैं। ...
कुदरगढ़ की पवित्र गाथा: जहां देवी दुर्गा ने किया था राक्षस कुदुर का वध, आज भी गूंजती है भक्ति की घंटियां

कुदरगढ़ की पवित्र गाथा: जहां देवी दुर्गा ने किया था राक्षस कुदुर का वध, आज भी गूंजती है भक्ति की घंटियां

यात्रा, विशेष समाचार
सूरजपुर, 12 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित कुदरगढ़ माता मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां देवी दुर्गा ने असुर कुदुर का अंत किया था, और तभी से यह पर्वतीय क्षेत्र भक्तों के लिए शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में “कुदुर” नामक राक्षस इस क्षेत्र में आतंक फैलाता था। देवी दुर्गा ने इसी स्थल पर उसका वध किया और उसी के नाम पर इस स्थान को “कुदरगढ़” कहा जाने लगा — अर्थात वह दुर्ग जहां कुदुर का अंत हुआ। राक्षस का संहार करने के बाद देवी यहीं विराजमान हो गईं, और तब से यह स्थान “मां कुदरगढ़” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। समुद्र तल से लगभग 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मां कुदरगढ़ मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 1000 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। भक्तों का विश्वा...