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Tag: सामाजिक समरसता

राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए घातक: सदानंदन

राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए घातक: सदानंदन

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नामित सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि जो लोग आज संसद में लोकतंत्र और मानवता की बातें कर रहे हैं, उन्होंने ही 31 वर्ष पहले उन पर जानलेवा हमला किया था। सदन में व्हीलचेयर पर बैठकर आए सदानंदन ने बताया कि एक संगठित आपराधिक गिरोह ने उन पर हमला कर उनके दोनों पैर काट दिए थे। उन्होंने इस हमले का संबंध अपरोक्ष रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जोड़ते हुए कहा कि हमला करने वाले लोग “इंकलाब ज़िंदाबाद” का नारा लगा रहे थे। सदानंदन ने कृत्रिम पैर को दिखाते हुए कहा कि यही वजह है कि वे खड़े होकर नहीं बोल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह हमला तब हुआ जब वह अपने चाचा के घर से लौट रहे थे। सदानंदन ने कहा, “आप लोकतंत्र और मानवता की बात करते हैं, लेकिन आपकी राजनीति हिंसा पर आधार...
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु रविदास की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरु रविदास की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महान संत, समाज सुधारक और मानवतावादी विचारक गुरु रविदास की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास के विचारों में न्याय, समानता और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो आज की जनकल्याणकारी सरकारी योजनाओं की मूल प्रेरणा है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गुरु रविदास जी द्वारा प्रज्वलित सामाजिक समरसता, समानता और सद्भावना का दीप देशवासियों के मार्ग को सदैव आलोकित करता रहेगा। उनके विचार समाज को विभाजन से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे के सूत्र में बांधने की प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास का जीवन सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष और मानवता की सेवा को समर्पित था। उन्होंने अपने उपदेशों और रचनाओं के माध्य...
भारत का निम्न मध्यम आय से उच्च मध्यम आय श्रेणी में अग्रसर होना

भारत का निम्न मध्यम आय से उच्च मध्यम आय श्रेणी में अग्रसर होना

लेख
By: प्रहलाद सबनानी भारत आज अपने आर्थिक इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। पिछले कुछ दशकों के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में जिस गति से परिवर्तन और विस्तार देखने को मिला है, उसने न केवल देश के आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ किया है बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को भी नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में भारत के निम्न मध्यम आय श्रेणी से उच्च मध्यम आय श्रेणी में परिवर्तित होने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत को निम्न आय श्रेणी से बाहर निकलकर निम्न मध्यम आय श्रेणी में पहुँचने में लगभग 60 वर्षों का समय लगा। वर्ष 1962 में भारत की प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय मात्र 90 अमेरिकी डॉलर थी, जो मिश्रित वार्षिक 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ वर्ष 2007 में बढ़कर 910 अमेरिकी डॉलर हो गई। इसी वर्ष भारत को विश्व बै...
हिंदू समाज की एकता से संस्कृति और अखंडता की सुरक्षा संभव: दत्तात्रेय होसबाले

हिंदू समाज की एकता से संस्कृति और अखंडता की सुरक्षा संभव: दत्तात्रेय होसबाले

राष्ट्रीय
दरभंगा, 17 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। बिहार में दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड अंतर्गत लगमा गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एकदिवसीय विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक समरसता और हिंदू समाज की एकता पर विशेष जोर दिया। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब हिंदू समाज में विभाजन की दरार उत्पन्न हुई है, तब-तब विदेशी आक्रांताओं ने देश पर शासन किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की एकता ही भारत को सशक्त बनाती रही है और यही देश की सबसे बड़ी ताकत रही है। जब समाज संगठित रहा, तब राष्ट्र ने उन्नति की और जब समाज में बंटवारा हुआ, तब देश को बाहरी आक्रमणों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कह...
भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ, दिया गया स्वदेशी और राष्ट्रहित का संदेश

भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष पर हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ, दिया गया स्वदेशी और राष्ट्रहित का संदेश

मध्य प्रदेश, राज्य
भोपाल, 12 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी भोपाल में सोमवार को हिंदू सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह सम्मेलन कैंपियन ग्राउंड के निकट आयोजित किया गया, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इस अवसर पर प्रस्तुत एक विशेष नाटक ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। नाटक के माध्यम से वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक परिदृश्यों पर गहराई से विचार प्रस्तुत किए गए। नाटक में अमेजन, उबर, पिज्जा हट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को उजागर करते हुए दिखाया गया कि देश किस तरह विदेशी उत्पादों और सेवाओं पर निर्भरता की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तुतियों के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्वदेशी विकल्पों की अनदेखी से भारत को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। नाटक ने अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को भी दर्शाया, जिसम...
मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

मकर संक्रांति त्योहार के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत

लेख
-पंकज जगन्नाथ जयस्वाल। हर साल 14 जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति के त्योहार का महत्व भारतीय सौर कैलेंडर के अनुसार है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति में खगोलीय घटनाओं और कृषि चक्रों से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत देती है, जो सर्दियों के अंत और फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक है। देश के विभिन्न हिस्सों में इस दिन को विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे कि उत्तरी भारत में लोहड़ी, असम में भोगली बिहू, और दक्षिण भारत में पोंगल। इस दिन तिल और गुड़ से बने लड्डू का विशेष महत्व है, जो सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इस उत्सव को सामाजिक समरसता और छुआछूत के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाता है, और आधुनिक परिवेश में पर्यावरण की रक्षा के लिए बायोडिग्रेडेबल पतंग उड़ाने जैसी प्रथाओं को अपनाता है। मकर संक्रांति न...