
नई दिल्ली, 02 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नामित सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि जो लोग आज संसद में लोकतंत्र और मानवता की बातें कर रहे हैं, उन्होंने ही 31 वर्ष पहले उन पर जानलेवा हमला किया था। सदन में व्हीलचेयर पर बैठकर आए सदानंदन ने बताया कि एक संगठित आपराधिक गिरोह ने उन पर हमला कर उनके दोनों पैर काट दिए थे। उन्होंने इस हमले का संबंध अपरोक्ष रूप से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जोड़ते हुए कहा कि हमला करने वाले लोग “इंकलाब ज़िंदाबाद” का नारा लगा रहे थे।
सदानंदन ने कृत्रिम पैर को दिखाते हुए कहा कि यही वजह है कि वे खड़े होकर नहीं बोल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह हमला तब हुआ जब वह अपने चाचा के घर से लौट रहे थे। सदानंदन ने कहा, “आप लोकतंत्र और मानवता की बात करते हैं, लेकिन आपकी राजनीति हिंसा पर आधारित है। राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए घातक है।” उनके बयान के बाद विपक्षी सदस्यों ने विरोध शुरू कर दिया। माकपा के जॉन ब्रिटास ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए कहा कि राज्यसभा में किसी भी वस्तु को प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं है। इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन के नियमों के तहत कार्रवाई करने की बात कही।
सदानंदन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश इस समय अमृत काल में प्रवेश कर चुका है और विकसित भारत का संकल्प दीर्घकालिक सोच और सामूहिक प्रयासों से ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है और यह दिखाता है कि महिलाएं देश के विकास और सुरक्षा में सबसे आगे खड़ी हैं।
सदन में उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “विरोध केवल विरोध के लिए नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर हमें एकजुट होकर देश के साथ खड़ा होना चाहिए।” केंद्रीय मंत्री मेधा विश्राम कुलकुर्णी ने सदानंदन के विचारों का समर्थन किया।
चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने सरकार पर सामाजिक समरसता बिगाड़ने और आर्थिक असमानता बढ़ाने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने कहा कि मौजूदा सरकार “इनकार की सरकार” है और उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण को डी ग्रेड देने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी सच्चाइयों को स्वीकारने के बजाय इनकार कर रही है और देश में नफरत भरे भाषणों की घटनाएं बढ़ रही हैं।
