मिथिला की दीपावली में संठी की अहमियत, अब 10 रुपए में मिलती है
दरभंगा, 03 नवंबर (हि.स.)। मिथिला की लोकसंस्कृति में दीपावली केवल दीप जलाने और लक्ष्मी‑गणेश की पूजा तक सीमित नहीं रहती। यहाँ कई ऐसी रीति‑रिवाज़ हैं जिनमें सामान्य ग्रामीण वस्तुओं को भी विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ दिया जाता है। इनमें से एक है पटसन की संठी, जिसके बिना उक्का‑पाती और अगले दिन सुबह होने वाली दरिद्र खेदना की रस्म अधूरी मानी जाती है। पहले यह संठी लगभग हर घर में खेतों से मुफ्त में उपलब्ध रहती थी, पर अब इसकी कमी इतनी बढ़ गई है कि लोग इसे बाजार से खरीद रहे हैं।
यह दृश्य मंगलवार को तारडीह प्रखंड के कुरसो हाट में देखा गया। दीपावली की तैयारी के बीच लोग 10 रुपए प्रति संठी की दर से इसे खुशी‑खुशी खरीदते दिखे। जहाँ कभी पटसन की खेती से घर‑घर में यह सामग्री सहज उपलब्ध रहती थी, अब यह त्योहार की एक अनिवार्य वस्तु बनकर बिक रही है।
मिथिला में दीपावली की शाम को उक्का‑पाती की विशिष्ट परम्परा...
