हरियाणा में पराली जलाने की रोकथाम पर सीईईडब्ल्यू का नया अध्ययन
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। एक नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, हरियाणा के 12 जिलों के 144 गांवों में 1,588 किसानों के बीच जनवरी से मार्च 2026 के दौरान पराली प्रबंधन के तरीके अलग-अलग पहचाने गए। पराली का उपयोग करने वाले 39 प्रतिशत किसान इसे पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग करते हैं, 38 प्रतिशत इसे गांठें बनवाकर बेचते हैं, जबकि 32 प्रतिशत सुपर सीडर जैसी मशीनों से फसल अवशेषों को खेत में मिलाकर मिट्टी को सुधारते हैं।
सर्वेक्षण में पाया गया कि पराली की गांठें बनाने या चारे के रूप में इस्तेमाल करने वाले 80 प्रतिशत किसान 2026 में भी इन तरीकों को अपनाना चाहते हैं। केवल 6 प्रतिशत ने पराली जलाने का उल्लेख किया, और 26 प्रतिशत ने अपने गांवों में जलने की जानकारी दी। पराली नहीं जलाने के लिये 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने वाली योजना के बारे में लगभग 80 प्रतिशत किसानों को जानकारी है, परंतु...
