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MP: डिप्टी CM शुक्ल ने IAS वर्मा के बयान को बताया विकृत मानसिकता का प्रतीक

भोपाल। आईएएस अधिकारी (IAS officer) और मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा (Santosh Verma) की ओर से ब्राह्मण समाज (Brahmin society.) को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में गुरुवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल (Deputy Chief Minister Rajendra Shukla) ने भी अपनी नाराजगी जताई और वर्मा के उस बयान को विकृत मानसिकता का प्रतीक बताया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक IAS अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनसे उनके बयान पर स्पष्टीकरण मांगा है, स्पष्ट जवाब ना मिलने पर उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाएगी।


इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ने लिखा, ‘एक IAS अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। किसी भी समाज के बहन एवं बेटियों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का परिलक्षण है।’


आगे उन्होंने लिखा, ‘एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी के ऐसे विचार न केवल सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि प्रशासनिक गरिमा पर भी प्रश्न उठाते हैं। सरकार की स्पष्ट मान्यता है कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा मातृशक्ति के विरूद्ध ऐसी टिप्पणी करना सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादा दोनों के विरूद्ध है।’


पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, ‘इस प्रकार की सोच भारतीय संस्कृति और हमारी परंपराओं का भी अपमान करती है। सभी वर्गों का सम्मान हमारी परंपरा का मूल है और किसी भी समुदाय विशेष को लक्षित कर की गई टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। इसी आधार पर सरकार द्वारा उनसे बयान पर स्पष्टीकरण मांगा गया है जो संतुष्टि प्रदायक न होने पर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।’


यह सारा विवाद बीती 23 नवम्बर को तब शुरू हुआ था, जब राजधानी भोपाल में हुए अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संगठन के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा ने ब्राम्हणों पर भद्दी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या वह उससे संबंध न बना ले, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।’ उनके दिए इसी बयान के बाद ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हो गईं और उनमें आक्रोश व्याप्त है। हालांकि विवाद बढ़ने पर वर्मा ने अपने बयान की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाते हुए अपनी ओर से सफाई दी और कहा कि मेरे शब्दों से अगर ब्राह्मण समाज को ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं, हालांकि इसका ज्यादा असर नहीं हुआ।


वर्मा के खिलाफ राज्यभर में बढ़ते विरोध को देखते हुए मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार देर शाम उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि क्यों न उनकी टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। नोटिस के मुताबिक उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है और अगर वह इसमें विफल होते हैं तो उनके खिलाफ आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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