
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)।
इस महीने के मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” को 12 वर्ष की उम्र पर पहुँचने का अवसर मिला। विजयदशमी के पावन अवसर पर, 12 वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस कार्यक्रम को लोगों के साथ संवाद का नया माध्यम बनाकर चुना था। उन्होंने इस दौरान अपने संवाद की यात्रा को “लोगों के प्रयासों को जानने की तीर्थयात्रा” के रूप में वर्णित किया है।
आज, 139वें एपिसोड पर, प्रधानमंत्री ने फिर से इस बात पर जोर देते हुए कहा, “मेरे लिए मन की बात किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है – यह हमारे लोगों के प्रयासों को गहराई से समझने और उनके योगदान को सलाम करने की यात्रा है।” यह कथन उनकी नीतिगत संवाद की निरंतरता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रत्येक महीने के अंतिम रविवार को इस कार्यक्रम के प्रसारण के दौरान, प्रधानमंत्री लोगों से जुड़ने के लिए रेडियो को चुना है। इस मंच पर, वे समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों की कहानियाँ साझा करते हैं और जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हैं।
इस कार्यक्रम की खासियत यह है कि यह न सिर्फ राजनीतिक घोषणाओं का माध्यम है, बल्कि यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ नागरिक अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री इस प्लेटफॉर्म पर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के प्रयासों को सलाम करते हैं, जिससे यह कार्यक्रम देश की सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करता है।
इस प्रकार, “मन की बात” कार्यक्रम ने 12 वर्षों में एक स्थायी संवाद का माध्यम बनकर भारतीय समाज की आवाज़ को सुना है, और यह जारी रहेगा क्योंकि प्रधानमंत्री की दृष्टि में यह एक तीर्थयात्रा है जो लोगों के योगदान को गहराई से पहचानने और सम्मानित करने का प्रयास करती है।
