
कोलकाता, 18 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। महा सप्तमी की शाम को चोरबगान सार्वजनिक पूजा पंडाल में भीड़भाड़ के कारण भयानक भगडड़ हुआ। तेज बारिश के अचानक शुरू होने और बाहर भारी ट्रैफ़िक जाम के कारण सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ पंडाल में प्रवेश करने लगे, जिससे अंदर भीड़ के दबाव से भगडड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना के बाद तुरंत दमकल, कोलकाता पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट टीम ने सहायता कार्य प्रारम्भ किया और घायलों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज पहुँचा दिया। वहाँ इलाज के दौरान मृतकों की संख्या १८ तक पहुँच गई, जबकि २५ अन्य गंभीर रूप से घायल रह गए।
पुलिस ने १२ व्यक्तियों—पूजा समिति के आयोजकों और स्वयंसेवकों सहित—को भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा में लापरवाही के संदेह में हिरासत में ले लिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय के साथ अस्पताल जाकर स्थिति का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का आश्वासन दिया। उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर एक वर्तमान न्यायाधीश के नेतृत्व में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की स्थापना की मांग की, जिससे इस त्रासदी की न्यायिक जांच सुनिश्चित हो सके।
विधवा परिवारों को प्रत्येक मृतक के लिये २५ लाख रुपये की अनुग्रह राशि तथा परिवार के एक सदस्य को ग्रुप‑डी सरकारी पद दिया जाएगा। घायलों को ५ लाख रुपये की आर्थिक सहायता के साथ उनके द्वारा चुने गए किसी भी निजी अस्पताल में मुफ्त उपचार का पूर्ण खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। साथ ही, CCTV फुटेज की सघन जांच चल रही है और लापरवाही करने वालों को सजा से बचाया नहीं जाएगा।
कोलकाता मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान कुछ जूनियर डॉक्टरों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी और आपातकालीन ट्रॉमा केयर सेंटर की अनुपस्थिति पर तीखा प्रकोप जताया, साथ ही गंभीर मामलों को निजी अस्पतालों में “आनन‑फानन” रेफ़र करने के फैसले की निंदा की।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को संवेदनाएँ भेजीं। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने प्रशासन की लापरवाही को दोषी ठहराते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की, जबकि मुख्यमंत्री ने कहा कि संवेदनशील समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए और पिछले साल के अन्य आपदाओं का हवाला देते हुए सरकार की प्राथमिकता उपचार और न्याय प्रदान करना है।
