
उज्जैन, 18 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व‑प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार की सुबह चार बजे ही भस्म आरती का पवित्र समारोह संपन्न हुआ। मंदिर के पट के खुलते ही गर्भगृह में स्थित भगवान महाकाल की प्रतिमाओं का विशेष पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान को जलाभिषेक तथा दूध, दही, घी, शक्कर और फल‑रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया।
पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर देव को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड चढ़ाकर विशेष शृंगार किया गया। तत्पश्चात देवालय के ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म रमाई गई और महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित किया गया।
भस्म आरती समाप्त होने के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्प से सजा कर राजा स्वरूप में शृंगार किया गया। इस अवसर पर उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा विभिन्न फूलों की मालाएँ अर्पित की गईं। मोगरे और गुलाब के पुष्पों से सजे महाकाल को फल‑मिष्ठान के भोग से प्रसन्न किया गया।
दिवस भर मंदिर परिसर में जयकारों की गूँज रही। हजारों श्रद्धालु भस्म आरती के दर्शन के लिए आए और नंदी हॉल व निर्धारित दर्शन स्थलों से भगवान महाकाल तथा नंदी महाराज के दर्शन कर मनोकामनाएँ व्यक्त कीं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही परम्परा प्रतिदिन जारी रहती है और देश‑भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंच कर इस अनूठी भस्म आरती में भाग लेते हैं।
