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इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश: यूपी पुलिस सिपाही‑होमगार्ड भर्ती 2025 के अभ्यर्थियों की ऊँचाई‑सीने की दोबारा नाप निर्धारित

प्रयागराज, 17 अक्टूबर (हिंदी प्रेस ब्यूरो)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उ.प्र. पुलिस सिपाही भर्ती 2025 व यूपी होमगार्ड भर्ती 2025 के उन अभ्यर्थियों को राहत दी है, जिन्हें शारीरिक मानक परीक्षा में ऊँचाई या छाती की माप कम बताकर बाहर कर दिया गया था। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने अनुज कुमार और 60 से अधिक जुड़ी याचिकाओं पर आदेश जारी किया। कोर्ट ने चार श्रेणियों के याचिकाकर्ताओं की ऊँचाई‑छाती की दोबारा माप के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के प्राचार्य को एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। नाप 31 अक्टूबर 2026 को होगी, तथा बोर्ड को सीलबंद रिपोर्ट 4 नवम्बर 2026 को अदालत में पेश करनी होगी; उसी दिन मामलों की अगली सुनवाई भी आयोजित की जाएगी।

याचिकाकर्ता पक्ष में अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडेय तथा अन्य व मेडिकल विश्वविद्यालय की ओर से बालेश्वर चतुर्वेदी, राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एम सी चतुर्वेदी ने भाग लिया। तथ्यात्मक अंतर के कारण कोर्ट ने याचिकाओं को पाँच समूहों में विभाजित किया:

1. पहला समूह – जिनकी पूर्व परीक्षाओं में निर्धारित ऊँचाई सही थी, पर इस बार कम ऊँचाई दर्ज हुई।
2. दूसरा समूह – जिनका छाती माप पहले मान्य था, पर अब कम बताया गया।
3. तीसरा समूह – जिनकी ऊँचाई पहली चरण एवं अपील चरण में अलग‑अलग मापी गई।
4. चौथा समूह – जिनको अपील अधिकार तथा केवल 24 घंटे की अपील अवधि के बारे में जानकारी नहीं थी, इसलिए अपील नहीं कर पाए।
5. पांचवा समूह – जिनकी दोनों बार माप समान रही, पर निजी अस्पताल/डॉक्टर के प्रमाणपत्र के आधार पर कमी का दावा किया गया।

कोर्ट ने कहा, सामान्यतः एक‑दो साल में ऊँचाई या छाती में बदलाव नहीं होता, अतः प्रथम व द्वितीय समूह में माप की त्रुटि को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। तीसरे समूह में राज्य सरकार ने दो बार की माप में अंतर को नकार नहीं सका। चौथे समूह के युवाओं को प्रक्रिया की अज्ञानता के कारण विशेष ध्यान दिया गया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सौरभ यादव केस का हवाला देते हुए स्वतंत्र बोर्ड से पुनः माप कराना उचित माना।

राज्य ने तर्क दिया कि अपील के बाद की माप ही अंतिम होती है, परन्तु कोर्ट ने स्वतंत्र बोर्ड की रिपोर्ट को अनिवार्य किया। सभी याचिकाकर्ताओं को 31 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे तक जी एम यू, लखनऊ में उपस्थित रहना अनिवार्य है; आधार कार्ड, पहचान‑पत्र, पीएसटी प्रवेश पत्र एवं आदेश की प्रमाणित प्रति साथ लानी होगी। अनुपस्थिति पर कोई अतिरिक्त छूट नहीं दी जाएगी। भर्ती बोर्ड का एक अधिकारी तथा होमगार्ड के महानिदेशक/कमांडेंट जनरल एक अधिकारी उपस्थित रहेंगे, पर पूर्व माप की जानकारी बोर्ड को नहीं दी जाएगी।

निजी अस्पताल के प्रमाणपत्र वाले पाँचवें समूह को कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी; उनकी याचिकाएँ खारिज कर दी गईं। याचिका संख्या 15089, 13810, 13824 (2026) को दो‑सप्ताह बाद अलग सूची में सुनवाई के लिए रखा गया। याचिका संख्या 14337, 13227, 14825, 15494, 14722 (2026) में कई याचिकाकर्ता होने के कारण अलग आदेश जारी किए जाएंगे।

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