
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) “सबको एक समान स्तर पर लाता है, कौन जीतेगा, यह इंसानी समझ तय करेगी” यह विचार भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम संबलपुर) के संस्थापक निदेशक प्रो. महादेव जयसवाल ने नई दिल्ली स्थित आईएसआईडी कैंपस, वसंत कुंज में आयोजित बिजनेस कॉन्क्लेव के दौरान व्यक्त किया।
इसी कॉन्क्लेव में नीति‑निर्माता, उद्योग‑नेता, फैकल्टी सदस्य और छात्र एक ही मंच पर “द ह्युमन अडवांटेज इन एआई ऐज” थीम पर चर्चा करने हेतु एकत्र हुए। जयसवाल ने बताया कि इस वर्ष के बिजनेस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि अगले दशक में जब “इंटेलिजेंस, स्पीड और स्केल” सभी प्रतिस्पर्धियों के पास समान हो जाएँ, तब भारतीय कंपनियों को किन विशिष्ट क्षमताओं से अलग किया जा सकता है।
वे यह रेखांकित करते हुए बोले, “जब हर कंपनी समान एआई टूल्स खरीद सकती है, तो वास्तविक लाभ मनुष्य को ही प्राप्त होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था, शासन और शिक्षा को आकार देगा और भारत को इस तकनीक के मानवीय पहलू में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
प्रो. जयसवाल ने एआई के तीन प्रमुख उपयोगों की सूची दी: कॉग्निटिव ऑटोमेशन (संज्ञानात्मक स्वचालन), कॉग्निटिव असेसमेंट (संज्ञानात्मक मूल्यांकन), और कॉग्निटिव एंगेजमेंट (संज्ञानात्मक जुड़ाव)। उन्होंने उद्योग को केवल ऑटोमेशन तक सीमित न रहने, बल्कि बचे दो पहलुओं पर भी बराबर ध्यान देने का आग्रह किया, क्योंकि “सबसे प्रभावशाली और आधुनिक उपयोग वहीं छिपे हैं जहाँ मानव की समझ और रचनात्मकता शामिल है”।
इस प्रकार, आईआईएम संबलपुर के इस वार्षिक बिजनेस कॉन्क्लेव ने एआई के व्यापक उपलब्धियों को मानवीय समझ के साथ जोड़ते हुए भारतीय उद्यमों को भविष्य के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में सफल होने के लिये दिशा‑निर्देश प्रदान किए।
