
भोपाल, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सोयाबीन न केवल हमारे किसान‑जनों की प्रमुख आय का स्रोत है, बल्कि घर‑घर का पोषण और उद्योगों के लिये कच्चा माल भी है। वह यह भी बतलाते हुए कहे कि प्रदेश का सोयाबीन खेतों से निकलकर विश्व‑बाज़ारों में अपनी पहचान बना रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और राज्य में उद्योगों को गति मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष चल रहे कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत सरकार खेत‑स्तर पर उर्वरक‑बीज, बिजली‑पानी की सुविधाएँ सुधारने से लेकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाने के लिये कई कदम उठा रही है। वर्तमान में न्यूट्रिशन‑बेस्ड फूड की माँग लगातार बढ़ रही है, और इस संदर्भ में मध्य प्रदेश को विशेष लाभ का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि राज्य अन्न उत्पादन में दूसरा और दुग्ध उत्पादन में तिहाई स्थान पर है, जबकि दालें, मिलेट और मत्स्य उत्पादन में भी अग्रणी है। प्रदेश की खाद्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण तक की इको‑सिस्टम मजबूत है, और बड़े पैमाने पर सोयाबीन की फसल राज्य तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिये महत्वपूर्ण योगदान देती है।
डॉ. यादव ने कहा कि देश में सोयाबीन की कुल खेती का 45 % क्षेत्रफल मध्य प्रदेश में स्थित है और कुल उत्पादन में 35 % से अधिक हिस्सेदारी है। राज्य के 50 से अधिक जिलों में यह फसल उगायी जाती है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिये अक्टूबर 2025 में सोयाबीन भावांतर योजना शुरू की गई, जिसके तहत पिछले वर्ष लगभग 7,17,000 किसानों के खातों में 1,475 करोड़ रुपये का अंतरभुगतान किया गया। इस वर्ष भी पंजीकरण प्रक्रिया जारी है। वित्त वर्ष 2025‑26 में सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सोयाबीन की असली शक्ति उसके वैल्यू‑ऐडेड चेन में निहित है—खेत में उत्पादन, उद्योगों में प्रसंस्करण, और तेल व प्रोटीन उत्पादों का निर्यात। यह श्रृंखला न केवल किसानों को समृद्ध बनाती है, बल्कि राष्ट्रीय पोषण सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को भी सुदृढ़ करती है। सरकार इस प्रक्रिया को सशक्त बनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और आधुनिक तकनीक एवं निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये निरंतर कार्य कर रही है।
