
भोपाल, 16 अक्टूबर (हिन्दुस्तान समाचार)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ाने के लिये निरंतर कार्य कर रही है। निवेशकों के साथ नियमित संवाद और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक विस्तार को सुनिश्चित करने के कदम उठाए जा रहे हैं।
इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश को देश की फूड बास्केट के रूप में मान्यता मिली है और सोयाबीन उत्पादन में इसका योगदान अहम है। वह बताते हैं कि मालवा को “सोयाबीन की राजधानी” कहा जाता है और देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का 45 % मध्य प्रदेश में ही उत्पन्न होता है।

सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, उद्यमियों और किसान प्रतिनिधियों की उपस्थिति को प्रदेश के लिए गौरव की बात बताया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगभग 15 उद्योगपतियों और उनके प्रतिनिधियों को सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री एवं रिफाइंड ऑयल के विपणन में उल्लेखनीय कार्य करने के लिये सम्मानित किया। इस अवसर पर सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने मुख्यमंत्री को शॉल व श्रीफल उपहार स्वरूप प्रस्तुत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, उनका सुशासन और जनकल्याण के प्रति संकल्प प्रदेश में गरीबों, महिलाओं, युवाओं एवं किसानों के कल्याण हेतु निरंतर कार्यों को प्रेरित करता है।

मुख्य चुनौतियों – प्रतिकूल मौसम और एल नीनो के प्रभाव – के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य सरकार किसान आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता सुधारने और कृषि‑आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रतिबद्ध है।
प्रदान की गई सुविधाओं में सस्ती बिजली, उपलब्ध भूमि व जल संसाधन शामिल हैं, जो निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। विभिन्न अंचलों की विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गये हैं, जिससे स्थानीय संसाधनों एवं रोजगार सृजन को नई दिशा मिली। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट‑2025 में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 30 % से अधिक को वास्तविक परियोजनाओं में बदला गया।
अंत में, प्रदेश में जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्रों को जोड़कर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है, जिससे औद्योगिक विकास तेज़ होगा और स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार सृजित होंगे। सोयाबीन एवं खाद्य तेल उद्योगों का विस्तार किसानों को बेहतर मूल्य दिलाएगा तथा उत्पादन‑संकलन‑प्रसंस्करण‑विपणन की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ करेगा।
