
काठमांडू, 16 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। नेपाल में जारी बाढ़ के कारण अक्टूबर माह में महंगाई में नया उछाल आया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर गणना की गई मुद्रास्फीति 6.34 % तक पहुँच गई, जबकि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में सरकार ने इसे 5.5 % तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा था।
सितंबर में मुद्रास्फीति 5.96 % थी, जो अक्टूबर में बढ़कर 6.34 % हो गई। तुलना के लिए देखें तो पिछले वित्तीय वर्ष के उसी महीने में मुद्रास्फीति केवल 1.87 % थी। ईरान‑अमेरिका के बीच तनाव के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उछाल आया, जिससे फरवरी से ही नेपाल में महंगाई का दबाव बना रहा है।
नेपाळ राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने बताया कि इस वृद्धि में मुख्य कारण भोटेकोशी बाढ़ है, पर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अक्टूबर में अचानक कोई तेज़ उछाल नहीं आया; बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों से ही कीमतों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य की समस्याएँ इस पर असर डाल रही थीं, जबकि घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई को पहले से ही ऊपर ले जाया था।
पौडेल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अक्टूबर में महंगाई में गिरावट की संभावना नहीं दिखती और “तत्काल महंगाई में सुधार की स्थिति नहीं है”। बड़े त्यौहारों का मौसम भी आने वाला है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। साथ ही, बूढ़ीगंडकी नदी में आए बाढ़ का विभिन्न वस्तुओं व सेवाओं पर असर पड़ेगा, जिसका प्रभाव महंगाई में दिखेगा।
उपभोक्ता अधिकारकर्मी माधव तिमिल्सिना ने सरकार पर महंगाई नियंत्रण को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई महीनों से महंगाई निरंतर बढ़ रही है और सरकार इस पर काबू पाने में असफल रही है। नवरात्र से ठीक पहले महंगाई में बढ़ोतरी ने आम जनता की कठिनाइयों को और बढ़ा दिया है। तिमिल्सिना ने सरकार से आग्रह किया कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम तुरंत उठाए।
