पुणे। पुणे के डीप-टेक स्टार्टअप Rechargion ने भारत की पहली 1 kWh क्षमता वाली सोडियम-आयन बैटरी पेश की है। इस स्टार्टअप की शुरुआत पुणे के रिसर्चर दंपति ने की है। खास बात यह है कि कंपनी की स्वदेशी बैटरी का इस्तेमाल हैदराबाद स्थित सीआईआई के गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर में शुरू हो गया है। इसे सोलर पैनलों से पैदा होने वाली बिजली से चार्ज किया जा सकता है।
आज के समय में लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल मोबाइल से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण तक कई क्षेत्रों में हो रहा है। इन बैटरियों के लिए भारत काफी हद तक दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में पुणे की कंपनी की सोडियम-आयन बैटरी को देश में वैकल्पिक बैटरी तकनीक विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
कैसे काम करती है ‘नमक वाली’ बैटरी?
हैदराबाद के गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर की छत पर लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करते हैं। यही बिजली 1 kWh सोडियम-आयन बैटरी में स्टोर की जाती है। बाद में इसी संग्रहित ऊर्जा का इस्तेमाल सेंटर के बाहर लगे एक बड़े डिस्प्ले को रोशन करने में किया जाता है।
इस पूरे सिस्टम को इस तरह तैयार किया गया है कि यह सोलर ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत के समय उसका इस्तेमाल कर सके। सोडियम-आयन तकनीक में लिथियम की जगह सोडियम का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इसे आम बोलचाल में ‘नमक वाली बैटरी’ भी कहा जा रहा है।
डीसी से एसी में बदलने की जरूरत नहीं
इस सिस्टम की एक खासियत इसका पावर फ्लो है। सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली और बैटरी से इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा के बीच करंट को बार-बार डीसी से एसी में बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कन्वर्जन के दौरान होने वाले ऊर्जा नुकसान को कम किया जा सकता है।
यह सिस्टम फिलहाल हैदराबाद के सीआईआई-गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर में काम कर रहा है। स्वदेशी सोडियम-आयन बैटरी के इस इस्तेमाल को भारत में वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीक विकसित करने की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
