नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच उन्हें पद से हटाने की मांग भी चर्चा में है। मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।
CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग और काफी कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 2023 के संबंधित कानून में भी यही प्रावधान दोहराया गया है।
सबसे पहले संसद में देना होता है नोटिस
CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद में प्रस्ताव के नोटिस से शुरू होती है। लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास यह अधिकार होता है कि वे उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद प्रस्ताव को स्वीकार करें या खारिज कर दें।
अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है तो दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ही जांच समिति गठित की जाती है। यदि नोटिस अलग-अलग दिनों में आता है तो संबंधित प्रक्रिया पहले उस सदन में आगे बढ़ती है जहां प्रस्ताव पहले स्वीकार किया गया हो।
तीन सदस्यीय समिति करती है आरोपों की जांच
प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत समिति में—
- सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या किसी अन्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
- किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
- एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ
शामिल होते हैं। दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिए जाने की स्थिति में समिति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति संयुक्त रूप से गठित करते हैं।
रिपोर्ट के बाद संसद में होता है मतदान
समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है। यदि समिति आरोपों को साबित मानती है, तो मामला संसद के सामने आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है।
CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है। संविधान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। CEC के लिए भी अनुच्छेद 324(5) के तहत यही संवैधानिक मानक लागू होता है।
अंत में राष्ट्रपति लेते हैं अंतिम फैसला
दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद संसद राष्ट्रपति को हटाने के लिए अपना अभिभाषण प्रस्तुत करती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं। यानी केवल संसद में नोटिस देने या बहस शुरू होने से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता; पूरी संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों में बड़ा अंतर
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की हटाने की प्रक्रिया अलग है। संविधान के अनुसार CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर हटा सकते हैं।
इसलिए CEC के खिलाफ महज राजनीतिक मांग या संसद में नोटिस दिए जाने से तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई नहीं होती। प्रस्ताव, उसकी स्वीकार्यता, जांच समिति, दोनों सदनों में विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति के आदेश—इन सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।
