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ट्रंप ने खुद को बताया ईरान का ‘नंबर वन टारगेट’…. बोले- उनकी हत्या की रच रहा साजिश!

अंकारा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को खुलकर कहा कि वे ईरान (Iran) के नंबर वन टारगेट हैं और तेहरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। ट्रंप ने NATO समिट के दौरान यह बयान देते हुए कहा कि ईरानी लीडरशिप (Iranian Leadership) उनसे बदला लेने पर तुली हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोई समझौता अब संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसी डर के चलते उन्होंने ईरान के साथ चल रही डील को पूरी तरह खत्म कर दिया?


ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। इस दौरान उन्होंने खुद को ईरान का ‘नंबर वन टारगेट’ बताया। तुर्की की राजधानी अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके कुछ लीडर थे जो अब नहीं रहे। उनके पास कुछ और लीडर थे जो शायद अब नहीं रहे। मैं भी शायद जाऊं, क्योंकि मैं उनका नंबर वन टारगेट हूं। वे घटिया लोग हैं। उन्होंने 47 साल से ऐसा ही किया है।


इस दौरान ट्रंप ने ईरान की पिछली नेतृत्व व्यवस्था को दुश्मन करार दिया, लेकिन कहा कि मौजूदा लीडरशिप थोड़ी ज्यादा समझदारी से काम कर रही दिख रही है। उन्होंने साफ कहा कि वे तनाव बढ़ाने के बजाय ईरान मुद्दे को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं। बता दें कि यह बयान दोनों देशों के बीच हालिया सैन्य टकराव के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बढ़ते तनाव के बीच आया है।


समझौता का प्रयास खत्म
गौरतलब है कि ट्रंप ने कुछ घंटे पहले ही घोषणा की कि ईरान के साथ चल रही बातचीत और समझौते की कोशिशें पूरी तरह खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ डील करना बस समय की बर्बादी है। NATO समिट में ट्रंप ने आगे कहा कि हम आज रात उन्हें कड़ी टक्कर देंगे। वे हर दिन समझौते का उल्लंघन करते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम अभी भी लागू है, तो उन्होंने जवाब दिया कि जहां तक मेरा सवाल है, यह खत्म हो चुका है।


ईरान का जवाबी हमला
इस बीच, ईरान ने ताजा अमेरिकी हमलों के जवाब में बुधवार को फारस की खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमला किया। ईरानी सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन बजाये गये। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। उधर, कतर की मंत्रिपरिषद ने ओमान तट के निकट उसके तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) वाहक जहाज पर हुए हमले के बाद ईरान से होर्मुज में खतरनाक गतिविधियां बंद करने की मांग की है।


कतर सरकार ने बयान में कहा कि देश अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। कतर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी जहाज परिचालकों से फिलहाल होर्मुज से जहाज नहीं भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे फारस की खाड़ी में फंसे लगभग 6000 नाविकों की सुरक्षा को अनावश्यक खतरा हो सकता है।

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