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बाल पुरस्कारों के लिए मप्र के बच्चों का आह्वान

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए आगे आएं प्रदेश के होनहार बच्चे

-डॉ. निवेदिता शर्मा

भारत प्रतिभाओं की धरती है। यहां के गांवों, कस्बों और शहरों में ऐसे हजारों बच्चे हैं, जो अपनी उम्र से कहीं आगे बढ़कर समाज, पर्यावरण, विज्ञान, खेल, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कोई कठिन परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखते हुए वैज्ञानिक सोच के साथ नवाचार कर रहा है, कोई जल और जंगल बचाने का अभियान चला रहा है, कोई राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में नाम रोशन कर रहा है, तो कोई अपनी संवेदनशीलता और साहस से समाज के लिए मिसाल बन रहा है। स्‍वभाविक है इस कार्य को मध्‍य प्रदेश के हमारे अपने अनेकों बच्‍चे भी कर रहे हैं, किंतु दुर्भाग्य यह है कि इनमें से अनेक बच्चों की प्रेरक कहानियां स्थानीय स्तर तक ही सीमित रह जाती हैं।

वास्‍तव में ऐसे बच्चों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश के बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” के लिए अधिक से अधिक नामांकन भेजने का आह्वान किया गया है। यह पुरस्कार उस सोच का सम्मान है, जो यह सिद्ध करती है कि परिवर्तन लाने के लिए बड़ी उम्र नहीं, बड़ा संकल्प चाहिए। यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो छोटी उम्र में भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है, जोकि पांच से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने असाधारण धैर्य, साहस, सृजनात्मकता और अदम्य जज़्बे का परिचय दिया हो। प्रत्येक वर्ष नई दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में भारत के राष्ट्रपति इन प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित करते हैं। पुरस्कार छह श्रेणियों, जिसमें कि बहादुरी, समाज सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शामिल हैं, मेंप्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के अवसर पर किया जाता है।

यह दिवस दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों, साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान और नैतिक साहस की स्मृतियों को याद करने के लिए है। मात्र नौ और सात वर्ष की आयु में अपने सिद्धांतों और आस्था से समझौता न करने वाले इन वीर बालकों का जीवन आज भी बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार उसी अमर परंपरा को वर्तमान पीढ़ी की उपलब्धियों से जोड़ने का माध्यम है, जहां साहस, सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता को राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता है।

वर्ष 2019 में इस पुरस्कार की नई व्यवस्था लागू होने के बाद से अब तक देशभर के 203 बच्चों को सम्मानित किया जा चुका है। इन बच्चों की उपलब्धियां विविध क्षेत्रों में रही हैं। किसी ने बाढ़ या आग जैसी आपदा में लोगों की जान बचाई, किसी ने वैज्ञानिक उपकरण विकसित किए, किसी ने दिव्यांगजनों के लिए उपयोगी तकनीक बनाई, किसी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए हजारों लोगों को जागरूक किया, तो किसी ने खेल या कला के क्षेत्र में भारत का गौरव बढ़ाया। इन प्रेरक कहानियों ने यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर, संसाधन या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती।

मध्य प्रदेश में भी ऐसी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जनजाति अंचलों से लेकर नगर, महानगरों तक अनेक बच्चे अपनी मेहनत और रचनात्मकता से नई पहचान बना रहे हैं। अलग-अलग दिशा में हमारे बच्‍चे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब ऐसे बच्चों के कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए आवश्यक है कि समय रहते उनका नामांकन किया जाए।

अब जिन छह श्रेणियों में यह पुरस्‍कार दिया जाता है, उनमें अपने जीवन की परवाह किए बिना दूसरों की सहायता की हो या संकट की घड़ी में अद्वितीय साहस और सूझबूझ का परिचय दिया हो, उसे बहादुरी के अंतर्गत सम्‍मान ये सम्‍मान मिलता है। समाज सेवा श्रेणी उन बच्चों के लिए है जिन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं, बच्चों या समुदाय के हित में प्रेरणादायी कार्य किए हों। पर्यावरण श्रेणी में प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता, जल संरक्षण, स्वच्छता और जलवायु संबंधी प्रयासों को महत्व दिया जाता है। खेल श्रेणी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए है। कला एवं संस्कृति में संगीत, नृत्य, चित्रकला, लोककला, रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान देने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाता है, जबकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्रेणी में ऐसे नवाचारों को मान्यता दी जाती है, जिनसे समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान हुआ हो या लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिली हो।

इस पुरस्कार की सबसे महत्वपूर्ण और अच्‍छी बात यह है कि इसके लिए किसी भी योग्य बच्चे का नामांकन उसके माता-पिता, शिक्षक, सामाजिक संस्था, जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन या कोई भी जिम्मेदार नागरिक कर सकता है। इतना ही नहीं, यदि कोई बच्चा स्वयं को पात्र मानता है, तो वह स्व-नामांकन भी कर सकता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि किसी प्रतिभाशाली बच्चे की उपलब्धि सिर्फ जानकारी के अभाव में छूटना नहीं चाहिए।

पात्रता की दृष्टि से आवेदक भारतीय नागरिक और भारत का निवासी होना चाहिए। 31 जुलाई 2026 को उसकी आयु 5 से 18 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा उपलब्धि या कार्य पिछले दो वर्षों के भीतर का होना चाहिए। आवेदन के साथ निर्धारित दस्तावेज, हाल का फोटो तथा उपलब्धि का संक्षिप्त विवरण नामांकन की अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन पोर्टल https://awards.gov.in पर जमा करना होगा।

यहां यह भी समझें कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार वास्‍तव में उस विश्वास का प्रतीक है कि राष्ट्र अपने बच्चों की प्रतिभा, संवेदनशीलता, साहस और नवाचार को देख रहा है, समझ रहा है और उसका सम्मान कर रहा है। यह सम्मान उन बच्चों को नई पहचान देता है और लाखों अन्य बच्चों को यह संदेश देता है कि सकारात्मक सोच, निरंतर मेहनत और समाज के प्रति जिम्मेदारी किसी भी उम्र में राष्ट्रीय गौरव का कारण बन सकती है।

मध्य प्रदेश के बच्‍चों के लिए यह अवसर प्रदेश की नई पीढ़ी की प्रतिभा को देश के सामने प्रस्तुत करने का भी है। यदि आपके आसपास कोई ऐसा बच्चा है जिसने अपनी उम्र से कहीं बड़ा कार्य किया है, तो उसकी कहानी राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का समय यही है। याद रखिए; एक सही समय पर किया गया नामांकन किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है और उसे देशभर के बच्चों के लिए प्रेरणा बना सकता है। संभव है, इस वर्ष राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होने वाले असाधारण बच्चों में मध्य प्रदेश के भी हमारे कई होनहार बालक या बालिका भी शामिल हों, बस आवश्यकता है उनकी प्रतिभा को पहचानने और समय पर आगे लाने की, जो कार्य आप सभी को अपने आस-पास के बच्‍चों की प्रतिभा को ध्‍यान में रखकर करना है।

(लेखक मध्‍य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष हैं)

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