लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और नए पीएम की कुर्सी के संभावित दावेदार माने जा रहे एंडी बर्नहैम के बीच सियासी तकरार कोई नई नहीं है। बर्नहैम अप्रैल 2020 में लेबर पार्टी नेता बने स्टार्मर के नेतृत्व पर गाहे-बगाहे सवाल उठाते रहे हैं। चार साल पहले उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि स्टार्मर उन्हें लेबर पार्टी के मुख्य मंच पर अपनी बातें रखने का मौका नहीं देते हैं। उस समय बर्नहैम ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर थे और उन्होंने इसे अपने पद का अनादर बताया था।
हालिया संसदीय उपचुनाव में मेकरफील्ड से शानदार जीत दर्ज करके संसद पहुंचे बर्नमैन ने अब अपनी स्थिति को इतना मजबूत लिया कि स्टार्मर को सीधे सत्ता से ही बाहर करने में सफल रहे। बर्नहैम का दावा है कि लेबर पार्टी में केवल उनके पास ही वह राजनीतिक आकर्षण और दूरदृष्टि है जो मतदाताओं से जुड़ सकती है और निजेल फराज के नेतृत्व वाली रिफॉर्म यूके पार्टी को हरा सकती है। प्रवासन नीतियों को लेकर लेबर सरकार के खिलाफ मुखर यह पार्टी पिछले साल की शुरुआत से ही हर चुनावी सर्वेक्षण में आगे चल रही है। कोविडकाल में अपने क्षेत्र में बचाव अभियान के लिए किंग ऑफ नार्थ का तमगा पाने वाले बर्नहैम को किंग ऑफ द नार्थ कहा जाने लगा था।
क्यों आसान नहीं होगी बर्नहैम की राह?
पार्टी सांसद भी उनकी क्षमताओं के कायल है, जैसा एलेक्स सोबेल ने कहा-बर्नहैम ने ऐसी दूरदृष्टि दिखाई है जिसके मतदाताओं को लुभा सकते हैं। बहरहाल, अगर बर्नहैम को कुर्सी मिलती है तो उन्हें असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पाले में लाना होगा। स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है।
लेबर पार्टी नेता के चुनाव में दो बार रहे असफल
बर्नहैम का जन्म लिवरपूल में हुआ था, जहां उनके पिता टेलीफोन इंजीनियर और मां रिसेप्शनिस्ट थीं। उन्होंने कैंबिज से पढ़ाई की और राजनीति में पहचान बनाने के जाने-माने रास्ते पर चल पड़े। पहले संसद में रिसर्चर और फिर सलाहकार बने। उन्होंने सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के कार्यकाल में एक जूनियर मंत्री के रूप में काम किया, और बाद में गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में संस्कृति मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री रहे। साल 2010 और 2015 में उन्होंने लेबर पार्टी का नेता बनने के लिए चुनाव लड़ा और दोनों ही बार असफल रहे।
बिना मुकाबले चुने जाने की संभावना
स्टार्मर के पद छोड़ने से पहले ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि बर्नहैम के अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, एंजेला रेनर और यवेट कूपर भी संभावित दावेदारों में शामिल है। इसमें से एक प्रमुख दावेदार वेस स्ट्रीटिंग ने बर्नहैम के समर्थन की घोषणा कर दी है। ऐसे में बर्नहैम के नेतृत्व के लिए किसी मुकाबले के बिना ही चुन लिए जाने की संभावना बढ़ गई है। उनके चयन की प्रक्रिया पूरी होने तक कीर स्टार्मर पद पर बने रहेंगे।
ब्रिटेन के साथ एफटीए लागू होने पर टिकीं भारत की नजरें
जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री बने मानवाधिकार बैरिस्टर कीर स्टार्मर ने भारत के साथ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को पूरा करने का वादा किया था। दोनों देशों ने 26 जुलाई 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए थे और इसे आगामी 15 जुलाई से लागू किया जाना जाना है। बर्नहैम के नए पीएम की संभावनाओं को देखते हुए भारत-ब्रिटेन एफटीए लागू होने में कोई दिक्कत न होने की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहते हुए भारत-ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया व भारत को मजबूती मिली।
