कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से सांसद बने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान के बागी तेवरों के बीच पार्टी के भीतर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान के अलग रुख अपनाने के बाद टीएमसी नेताओं ने उन पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने संसद के एक पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए कई दावे किए हैं।
संसद के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा पुराना प्रसंग सामने आया
श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान विपक्षी दल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान टीएमसी सांसद सदन के वेल में विरोध जता रहे थे, लेकिन यूसुफ पठान अचानक पीछे हट गए।
मेहदी के अनुसार, उन्होंने एक प्रमुख मुस्लिम सांसद को यूसुफ पठान को विरोध से दूर रहने की सलाह देते हुए सुना। इसके बाद पठान अपनी सीट पर लौट गए और काफी तनावग्रस्त दिखाई दे रहे थे। मेहदी ने दावा किया कि पूछने पर यूसुफ ने बताया था कि उन्हें भाजपा के खिलाफ मुखर होने से बचने की चेतावनी दी गई थी और कहा गया था कि ऐसा करने पर गुजरात में उनके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है।
महुआ मोइत्रा ने ओवैसी का नाम लिया
आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि वह नेता एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी थे। महुआ ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें वह घटना याद है और ओवैसी ही यूसुफ पठान को चेतावनी दे रहे थे।
इसके साथ ही महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान के मौजूदा रुख पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन पर विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति का समर्थन किया, जिसमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस नहीं था।
गुजरात की जमीन से जुड़े विवाद का भी जिक्र
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वडोदरा निवासी यूसुफ पठान का नाम सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़े विवाद में भी सामने आया था। माना जा रहा है कि इसी वजह से संभावित कार्रवाई का डर उनके राजनीतिक रुख को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ओवैसी और यूसुफ पठान की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया
महुआ मोइत्रा और आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी के दावों के बाद अब तक न तो यूसुफ पठान और न ही असदुद्दीन ओवैसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
टीएमसी में बढ़ा संकट
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक संकट उस समय और गहरा गया जब बागी सांसदों ने कम चर्चित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा की। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है।
वहीं, टीएमसी संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग हुए गुट को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने संकेत दिए हैं कि चुनाव चिह्न और पार्टी की मान्यता को लेकर मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
