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जदयू के विधायक पप्पू पांडेय को जमीन कब्जा मामले में 27 मई तक मिली राहत

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में चर्चित 16 एकड़ जमीन कब्जा मामले में मंगलवार को व्यवहार न्यायालय स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-3) सह एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने कुचायकोट से जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को 27 मई तक बरकरार रखा है। वहीं, इस मामले में नामजद अन्य आरोपितों सतीश पांडेय और चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल तिवारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

यह मामला कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में 16 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़ा है, जो पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जमीन पर जबरन कब्जा करने के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित भू-माफियाओं को विधायक पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी का संरक्षण प्राप्त था।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने विधायक पप्पू पांडेय के मामले में अगली सुनवाई की तारीख 27 मई निर्धारित की। इससे पहले भी उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई थी, जिसे अदालत ने अगली सुनवाई तक जारी रखा है। अदालत के इस फैसले से विधायक को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

दूसरी ओर, मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में आरोपित बनाए गए सतीश पांडेय और राहुल तिवारी को अदालत से राहत नहीं मिल सकी। दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। अदालत के फैसले के बाद कानूनी और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

राहुल तिवारी की ओर से पैरवी कर रहे पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित और सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। मीडिया से बातचीत में अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कहा कि अदालत ने विधायक पप्पू पांडेय के मामले की अगली सुनवाई 27 मई को तय की है, जबकि अन्य अभियुक्तों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि विस्तृत आदेश की प्रति मिलने के बाद वे उसका अध्ययन करेंगे और आगे की कानूनी रणनीति तय करेंगे।

मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। विपक्षी दल इस प्रकरण को लेकर सरकार और विधायक पर निशाना साध रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि विधायक को राजनीतिक कारणों से फंसाया जा रहा है। फिलहाल सभी की नजरें अब 27 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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