अभाविप : एक प्रासंगिक छात्र आंदोलन
– चेतस सुखाड़िया
भारत का छात्र आंदोलन केवल छात्रसंघ चुनावों या शैक्षणिक मांगों तक सीमित नहीं रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रनिर्माण तक विद्यार्थियों ने समय-समय पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि बदलते समय, शिक्षा के उभरते नए आयाम, तकनीकी क्रांति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में छात्र संगठनों की प्रासंगिकता क्या है? यदि कोई छात्र संगठन समय के साथ स्वयं को समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालते हुए विद्यार्थियों के हितों और राष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करता है, तो उसकी प्रासंगिकता स्वतः सिद्ध होती है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) इसी दृष्टि से भारत का एक प्रासंगिक छात्र आंदोलन है। जिसने स्वयं को कालसुसंगत बनाते हुए संपूर्ण विद्यार्थी समाज को अपने साथ जोड़ने कार्य कि...
