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Tag: स्मृति

इतिहास के पन्नों में 10 अक्टूबर: जब गजल सम्राट जगजीत सिंह की आवाज़ हुई ख़ामोश

इतिहास के पन्नों में 10 अक्टूबर: जब गजल सम्राट जगजीत सिंह की आवाज़ हुई ख़ामोश

राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। ‘होंठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो…’ इस पंक्ति से millions दिलों को जगजीत सिंह की मखमली आवाज़ की याद आती है। गजल सम्राट के रूप में प्रसिद्ध यह कलाकार 10 अक्टूबर 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह गए, जिससे संगीत जगत को एक अनमोल आवाज़ का नुकसान हुआ। उनकी मृत्यु के बाद भी, जगजीत सिंह के ग़ज़ल‑परिधान, उनकी गहरी और भावनात्मक अभिव्यक्तियों से भरपूर रचनाएँ आज‑कल भी सुनने वाले के दिलों को छूती रहती हैं। उनकी आवाज़ में जो सुखद सादगी और गहरी संवेदना का मेल था, वह आज भी नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। संगीत प्रेमियों ने उनके स्मरण में कई श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए, जहाँ उनके कई हिट ग़ज़लें—‘हमें तुमसे प्यार है’, ‘बहारों का मौसम’, ‘जाने कहाँ गए वो लोग’—फिर से सुनाई दीं। इस प्रकार, जगजीत सिंह की ग़ज़लें समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं औ...
सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास

लेख
By: परिचय दास सहजन के फूलों में नवजीवन का उजास परिचय दास वसंत की प्रथम आहट के साथ ही सहजन के पेड़ ने अपनी शाखाओं को नवजीवन के उजास से भर लिया। हल्की ठंडी हवा, धूप की धीमी परछाइयां और कोयल की आवाज के बीच सहजन के फूल अपनी नाज़ुक पंखुड़ियों को खोलने लगे। इन फूलों में एक अलौकिक सादगी थी, जैसे किसी गजल का पहला मिसरा-अनायास, लेकिन भीतर तक स्पंदित कर देने वाला। इन छोटे-छोटे सफेद फूलों की सुगंध में स्मृतियों का एक संसार बसता था। गांव की वह पगडंडी, जहां दुपहरिया की उनींदी हवा में सहजन की डालियां झूलती थीं। उनकी छांव में खेलते बच्चे, दोपहर की थकान से आंखें मूंदकर सुस्ताते किसान और किसी कोने में बैठी कोई स्त्री, जो फूलों को बटोर कर उनकी सब्ज़ी बनाने की सोच रही थी। सहजन का फूल केवल फूल नहीं था, यह किसी विरासत की तरह अगली पीढ़ी को सौंपा जाने वाला एक गीत था-मौन में गाया हुआ लेकिन दिल की गहराइयो...