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इराक की नई सरकार में अमेरिकी‑इज़राइल विरोधी खजाली को उप‑प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया

इराक की नई सरकार में अमेरिकी‑इज़राइल विरोधी खजाली को उप‑प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया

अंतरराष्ट्रीय
बगदाद, 16 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। इराक की संसद ने ईरान‑समर्थित असाएब अहल अल‑हक समूह के सदस्य लैथ अल‑खजाली को उप‑प्रधानमंत्री बनने की स्वीकृति दी। लैथ अल‑खजाली को अमेरिका और इज़राइल का कट्टर विरोधी माना जाता है; अमेरिकी अधिकारियों ने इस समूह को विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची में डाल दिया है। इस निर्णय के साथ प्रधानमंत्री अली अल‑जैदी की सरकार का गठन पूर्ण हुआ। संसद ने गुरुवार को तीन उप‑प्रधानमंत्री और 11 मंत्रियों की नियुक्तियों को मंजूरी दी। इनमें रक्षा मंत्री पद पर नायेफ अल‑शम्मरी तथा गृह मंत्री पद पर यासिर अल‑मलिकी को नामित किया गया। अल‑जजीरा के एक रिपोर्ट के अनुसार, लैथ अल‑खजाली, इस समूह के संस्थापक कैस अल‑खजाली के भाई हैं। अमेरिका ने 2020 में असाएब अहल अल‑हक को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था और दोनों भाइयों को “विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी” की सूची में शामिल किया था। अमेरि...
ईरान का इस्लामिक दुनिया से रिश्तों का जटिल जाल

ईरान का इस्लामिक दुनिया से रिश्तों का जटिल जाल

लेख
By: -------------- ईरान का इस्लामिक दुनिया से रिश्तों का जटिल जाल -विवेक शुक्ला रमजान के महीने में राजधानी दिल्ली में इस्लामिक देशों के राजनयिक आमतौर पर चाणक्यपुरी में स्थित सूडान एंबेसी में नमाज अदा करते हैं। पर ईरानी राजनयिक अपनी एंबेसी में ही नमाज अदा करते हैं। ईरान और शेष इस्लामिक संसार में दूरियों को इस उदाहरण से कुछ हद कर समझा जा सकता है। दरअसल, ईरान के इस्लामिक राष्ट्रों के साथ संबंध जटिल और बहुआयामी हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान ने शिया इस्लाम को अपनी विदेश नीति का आधार बनाया है, जो सुन्नी-बहुल मुस्लिम दुनिया के साथ उसके संबंधों को प्रभावित करता है। ईरान की सरकार खुद को इस्लामिक एकता का समर्थक बताती है लेकिन वास्तव में वह शिया प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश करती रहती है। ईरान की इस्लामिक क्रांति ने उसे मुस्लिम दुनिया में एक वैकल्पिक मॉडल के रूप में स्थापित किया, जहा...