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भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत


भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में चीतों के पुनर्वास से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2025 में तेजी से आगे बढ़ा। इस साल पार्क में 12 शावकों का जन्म हुआ। हालांकि दुख की बात ये है कि इनमें से तीन शावक अलग-अलग कारणों से जीवित नहीं रह सके। इसके बावजूद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

इस साल कुल 6 चीतों की हुई मौत

देश में चीतों के बारे में यह जानकारी प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि साल 2025 में कुल छह चीतों की मौत हुई, जिनमें तीन शावक शामिल हैं। इसके अलावा नामीबिया से लाए गए एक वयस्क चीते और दो उप-वयस्क चीतों की भी मौत दर्ज की गई। इस साल तीन मादा चीतों ने इन 12 शावकों को जन्म दिया था। अधिकारियों के अनुसार, शावकों की मौत के पीछे अलग-अलग प्राकृतिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण रहे।
7 दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका है चीता

आपको जानकर हैरानी होगी कि चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका था। इसे दोबारा देश में बसाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की। इसके तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को भारत लाया गया, जबकि फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।
चीतों को जल्द मिलेगा तीसरा ठिकाना

फिलहाल भारत में कुल 30 चीतों में से 27 कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब चीतों को भारत में तीसरा ठिकाना भी मिलने वाला है। मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के नए घर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल भारत में मौजूद 30 चीतों में से 19 का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। बीते तीन वर्षों में देश ने 20 चीतों के आयात के बाद अपनी कुल चीता आबादी में 10 की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की है।
8 और चीतों को भारत लाने की तैयारी

अधिकारियों के अनुसार, बोत्सवाना से आठ और चीतों को भारत लाने की तैयारी चल रही है। ये चीते वहां पहले ही पकड़े जा चुके हैं और फरवरी तक कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। प्रोजेक्ट चीता को भारत में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

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