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भाजपा की 2014 से भी ज्‍यादा ताकत, जानें देशभर में पार्टी के कितने विधायक


नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी पिछले 11 सालों से देश में सत्ता में है। वहीं 15 से अधिक राज्यों में भी अभी बीजेपी या उसके सहयोगी दलों का शासन है। 2014 से बीजेपी की ताकत लगातार बढ़ती गई है। वर्तमान में बीजेपी के 1600 से अधिक विधायक हैं। हम यह कह सकते हैं कि बीजेपी का स्वर्णिम काल चल रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई और उसके 89 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं।
2014 से बढ़ती गई बीजेपी की ताकत

देश भर में अब बीजेपी के विधायकों की संख्या 1654 हो गई है। वहीं 2014 के बाद से कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई है। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि किस प्रकार से कांग्रेस ने 1985 में रिकॉर्ड बनाया था लेकिन अब बीजेपी लगातार बढ़ती जा रही है और 2027 तक देश भर में उसके 1800 से अधिक विधायक हो जाएंगे।

बीजेपी के पोस्ट के अनुसार वर्ष 2014 में बीजेपी के पूरे देश में 1035 विधायक थे। जबकि 2015 में यह संख्या घटकर 997 हो गई। 2016 में बीजेपी को कुछ राज्यों में जीत मिली और उसकी संख्या बढ़कर 1063 हो गई। 2017 में बीजेपी के देश भर में कुल 1365 विधायक हो गए। इसमें सबसे अहम योगदान उत्तर प्रदेश का रहा, जहां पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली थी। 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी 312 सीटों के साथ सत्ता में आई थी।

2018 में बीजेपी के विधायकों की संख्या घट गई और यह 1184 पर आ गई। 2019 में बीजेपी के विधायकों की संख्या 1160 पर आ गई। 2020 में बीजेपी के विधायकों की संख्या 1207, जबकि 2021 में 1278, 2022 में 1289 और 2023 में 1441 हो गई। 2024 के लोकसभा में चुनाव में बीजेपी को झटका लगा लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में उसकी जीत हुई। 2024 में बीजेपी के विधायकों की संख्या 1588 पहुंच गई। वहीं अब 2025 खत्म होने वाला है और बिहार विधानसभा चुनाव भी खत्म हो गया है। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के देश भर में 1654 विधायक हो गए हैं, जो अब तक सबसे अधिक है।
कांग्रेस ने 1985 में बनाया था रिकॉर्ड

बीजेपी ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “भाजपा अब राज्य विधानसभाओं में अपनी सर्वोच्च शक्ति पर है और यह गति बढ़ती ही जा रही है। इसी गति से भाजपा अगले दो वर्षों में आराम से 1800 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी। तुलना के लिए कांग्रेस ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद आई व्यापक सहानुभूति लहर पर सवार होकर 1985 में लगभग 2018 सीटों के अपने शिखर को छुआ था। तब सत्ता को मजबूत करना और मतदाताओं को प्रभावित करना आसान था। अब अंतर स्पष्ट है: कांग्रेस को अपना शिखर विरासत में मिला जबकि भाजपा ने अपनी उन्नति अर्जित की है और उसे सहन किया है – सीट दर सीट, राज्य दर राज्य, संघर्ष दर संघर्ष। भविष्य उस पार्टी का है जो काम करती है, न कि उस पार्टी का जो विरासत पर टिकी रहती है।”

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