
देहरादून, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। उच्च न्यायालय ने चाय बागान से संबंधित लगभग 350 बीघा जमीन की खरीद‑फरोख्त और खुर्दबुर्द करने के आरोपों पर दायर याचिका की सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने सचिव राजस्व को शपथ पत्र पेश कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि उक्त भूमि में कौन‑सा भाग सरप्लस भूमि है और कौन‑सा भाग वास्तव में चाय बागान की जमीन है।
पहले की सुनवाई में, उच्च न्यायालय ने 7 जुलाई 2022 को विवादित भूमि की खरीद‑फरोख्त पर रोक लगा दी थी तथा रजिस्ट्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। इस शनिवार को मामले की नई सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष हुई।
विकेश सिंह नेगी, जो देहरादून के निवासी हैं, ने याचिका में यह आरोप लगाया कि सरकार में निहित की जानी चाहिए थी, ऐसी सरप्लस भूमि को अब बेचा जा रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, राजा चंद्र बहादुर सिंह की सरप्लस भूमि को वर्ष 1960 में सरकारी कब्जे में ले लिया जाना था, परन्तु लाडपुर, नथनपुर, रायपुर एवं अन्य क्षेत्रों में स्थित इस जमीन की कथित तौर पर फिर से खरीद‑फरोख्त की जा रही है।
याचिका में लगभग 350 बीघा भूमि की खरीद‑फरोख्त पर तत्काल रोक लगाने, संबंधित संपत्ति को तुरंत सरकारी कब्जे में लेने और इस लेन‑देन में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। अदालत ने अब तक के सबूतों को ध्यान में रखते हुए सचिव राजस्व को शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्टता प्रदान करने का निर्देश जारी किया है, जिससे यह तय किया जा सके कि विवादित भू‑क्षेत्र में कौन‑सा हिस्सा वैध सरप्लस है और कौन‑सा भाग अवैध रूप से बेचा गया है। यह आदेश भूमि की पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी ही घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से दिया गया है।
