
जगदलपुर, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। आज शनिवार को बस्तर जिले के मुख्यालय में स्थित शांति नगर के दुर्गा मंदिर में बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच की जिला बैठक आयोजित की गई। बैठक में बस्तर संभाग के विभिन्न प्रखंडों से सैकड़ों सदस्य और युवा भाग लेकर उपस्थित रहे।
बैठक में विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के पारंपरिक रीति-रिवाजों, माँ दंतेश्वरी की सेवा और दशहरा की विभिन्न रस्मों में सहयोग एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने पर सहमति व्यक्त की गई।
रामनाथ कश्यप ने कहा, “बस्तर दशहरा हमारी समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। पूर्व में जिस प्रकार सभी समाजों की सहभागिता से दशहरा की परंपराएँ निभाई जाती थीं, उसी प्रकार हमें आपसी समन्वय और एकजुटता के साथ आगे बढ़कर कार्य करना होगा।”
हरि साहू ने जोड़ा, “बस्तर दशहरा में विभिन्न समाजों के लोगों का स्वेच्छा से आगे आना प्रसन्नता का विषय है। हम सभी मिलकर बस्तर में आने वाले देवी‑देवताओं के पुजारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सेवा कार्य करेंगे।”
मुन्ना बजरंगी ने कहा, “बस्तर दशहरा विश्वप्रसिद्ध पर्व है, जो हमारी विशिष्ट संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाता है। आज भले ही दशहरा के आयोजन में प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका हो, लेकिन इसकी मूल आत्मा हमारी पारंपरिक मान्यताओं, रीति‑रिवाजों और सामाजिक सहभागिता में निहित है। इन परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए हम सभी को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।”
बैठक में जगदलपुर, नानगूर, बस्तर, भानपुरी, दरभा, बस्तानार, लोहंडीगुड़ा, नगरनार, बकावंड समेत विभिन्न क्षेत्रों से युवा उपस्थित रहे। सभी ने बस्तर दशहरा के मावली परघाव एवं अन्य पारंपरिक रस्मों के दौरान सहयोग और सुरक्षा के दृष्टि से अपनी सेवाएँ देने पर सहमति जताई। मंच द्वारा जल्द ही एक विशेष टीम का गठन कर सभी वॉलंटियर्स को उनकी योग्यता एवं आवश्यकता के अनुसार दायित्व सौंपे जाएंगे, ताकि सभी सदस्य आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
बैठक में आगामी मावली परघाव के दिन दोपहर 01 बजे दुर्गा मंदिर, शांति नगर, जगदलपुर में अगली बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। इस बैठक में सभी वॉलंटियर्स को उनकी जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएंगी तथा सेवा एवं सुरक्षा संबंधी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच सदैव बस्तर की संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहा है और भविष्य में भी इसी संकल्प के साथ कार्य करता रहेगा। अंत में हरि साहू ने सभी उपस्थित सदस्यों एवं वॉलंटियर्स का आभार व्यक्त करते हुए अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया।
