
प्रयागराज, 17 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी स्थित एक धार्मिक संस्थान से 4 करोड़ से अधिक की कथित गबन के मामले में आरोपित अकाउंटेंट विवेक कुमार की दोनों जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया। अभियोजन के अनुसार, विवेक कुमार ने बैंक की फर्जी जमा रसीदें तैयार कीं और धार्मिक चढ़ावों की रकम का गबन करके संस्थान को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने आरोपों की प्रकृति व गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इंकार किया, जबकि ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि कोई कानूनी बाधा न हो तो मुकदमे का शीघ्र निपटारा किया जाए।
विवेक कुमार सद्गुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे, जिसके वाराणसी, प्रयागराज और गया सहित कई शाखाएँ हैं। शिकायतकर्ता, जो वाराणसी के स्वरवेद महामंदिर धाम, मुड़ली उमरहा से जुड़े हैं, के अनुसार 23 सितंबर 2025 को उन्होंने संस्थान के कार्यालय में 20,000 रुपये के चढ़ावे की रसीद पेश की, जिस पर एचडीएफसी बैंक द्वारा जारी की गई जमा रसीद दिखायी गई। रसीद पर कर्मचारियों को संदेह होने पर बैंक शाखा में जांच की गई और उसे फर्जी पाया गया। आगे की जाँच में यह पता चला कि विवेक कुमार ने पहले जमा कराई कई अन्य रसीदें भी जाली थीं। अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि उसने बैंक कर्मचारियों को रिश्वत देने का प्रयास किया, जिससे संबंधित रिकॉर्डिंग बैंक के आंतरिक सर्वर पर मौजूद है।
विवेक कुमार के भाई अभिषेक कुमार, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, पर भी गबन में सक्रिय भूमिका का आरोप है। इसके अतिरिक्त, आरोपी पर जांच एजेंसी द्वारा जब्त करने से पहले अपने मोबाइल को फॉर्मेट करके महत्वपूर्ण साक्ष्य मिटाने का आरोप भी लगा। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 409 और 120‑B के तहत मुकदमा चल रहा है; विवेक कुमार को पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था।
जमानत की मांग करते हुए बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फँसाया गया है और वह किसी भी अपराध से मुक्त है। उन्होंने यह भी कहा कि विवेक कुमार ने संस्थान में लगभग 12 वर्ष काम किया है और उसके खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला नहीं दर्ज हुआ। बचाव पक्ष ने यह दावा किया कि इस मुकदमे का कारण एक पूर्व शिकायत है, जिसमें उनके भाई ने संस्थान के प्रभावशाली अधिकारियों पर पत्नी और डेढ़ साल के बच्चे का अपहरण करने का आरोप लगाया था।
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता ने जमानत के विरोध में कहा कि आरोपी ने भरोसे की स्थिति में रहकर धार्मिक दान की रकम से 4 करोड़ से अधिक की चोरी की। उन्होंने यह भी दर्शाया कि सीमित आधिकारिक आय के मुकाबले बड़ी संपत्ति अर्जित करने और विभिन्न निवेश करने का आरोप है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों को अस्वीकार कर दी और यह स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल जमानत संबंधी है और मुकदमे के मूल गुण‑दोष पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा।
