
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हिंदी समाचार)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)‑विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान एक सत्र में कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ने हेतु स्थानीय निकायों—विशेषकर नगर निगम और ग्राम पंचायतों—में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि “शहरों को निवेश योग्य बनाने के लिए मिलकर काम करना‑शहरी और जल अवसंरचना के लिए निजी पूँजी जुटाना” इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
सीतारमण ने भारत की त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय मिलकर आर्थिक विकास को गति देते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तीसरे स्तर पर आने वाले स्थानीय नगरपालिकाओं, कस्बों की नगरपालिकाओं और गांवों को सुधारों के साथ सशक्त बनाना अनिवार्य है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े और विश्व पूँजी का आकर्षण हो।

इसी दौरान उन्होंने जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के गवर्नर काज़ुहिको अमाकावा से मुलाकात की और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर तथा महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को विस्तृत करने पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने कहा कि इन क्षेत्रों में तकनीकी और वित्तीय साझेदारी दोनों ही भारत‑जापान संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकती है।
सीतारमण ने पहले ही बताया था कि भारत उन साझेदार देशों के लिए रुपया में व्यापार भुगतान को प्रोत्साहित करना चाहता है, जिनके पास विदेशी मुद्रा की कमी है, ताकि वे आवश्यक वस्तुओं का आयात जारी रख सकें। इस पहल से द्विपक्षीय व्यापार को स्थिरता मिलेगी और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
समग्र रूप से, वित्त मंत्री ने स्थानीय स्तर पर सुधारों को तेज़ करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और जापान के साथ स्वच्छ ऊर्जा‑सेमीकंडक्टर‑खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को भारत के विकास के प्रमुख स्तम्भ के रूप में पेश किया।
