Friday, September 25खबर जो असर करे |
Shadow

भोपाल में तैयार होंगे वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के अहम विद्युत उपकरण, भेल को मिली बड़ी जिम्मेदारी


भोपाल। देश में आधुनिक रेल परिवहन को गति देने की दिशा में भोपाल को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। भारतीय रेल ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) के संयुक्त समूह को 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार करने और 35 वर्षों तक उनके दीर्घकालिक रखरखाव का ठेका दिया है। करीब 24 हजार करोड़ रुपये के इस बड़े अनुबंध में भेल की भोपाल इकाई की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यहां वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के लिए मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर सहित प्रमुख विद्युत उपकरणों का निर्माण किया जाएगा।

भेल और टीआरएसएल ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम बनाया है। संयुक्त समूह के माध्यम से कुल 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे। इन ट्रेनों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा है और इनकी अधिकतम परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। वहीं ट्रेनसेट की डिजाइन गति 170 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक निर्धारित की गई है।

परियोजना के तहत भेल की अलग-अलग इकाइयों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भोपाल, झांसी और बेंगलुरु इकाइयां मिलकर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के निर्माण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाएंगी। झांसी इकाई कोच और बॉडी निर्माण से संबंधित काम संभालेगी, जबकि भोपाल इकाई ट्रेनसेट में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण विद्युत उपकरणों के निर्माण की जिम्मेदारी निभाएगी।

भोपाल यूनिट में मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर जैसे प्रमुख विद्युत उपकरण तैयार किए जाएंगे। इससे भेल की भोपाल इकाई के लिए आधुनिक रेल तकनीक के क्षेत्र में काम का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर उन्नत रेल उपकरणों के निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस अनुबंध की खास बात यह है कि इसमें केवल ट्रेनसेट का निर्माण ही शामिल नहीं है। संयुक्त समूह को तैयार की जाने वाली 80 ट्रेनों के 35 वर्षों तक लाइफसाइकिल मेंटेनेंस और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी भी दी गई है। यानी ट्रेन के निर्माण से लेकर उसके लंबे समय तक रखरखाव तक की व्यवस्था इसी परियोजना का हिस्सा होगी।

अनुबंध में करीब 9,600 करोड़ रुपये ट्रेनसेट की आपूर्ति के लिए निर्धारित हैं। वहीं लगभग 14 हजार करोड़ रुपये 35 वर्षों के दीर्घकालिक रखरखाव और अन्य संबंधित कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। इस तरह परियोजना का कुल अनुमानित मूल्य करीब 24 हजार करोड़ रुपये है।

इस परियोजना का उद्देश्य देश में ही आधुनिक रेल तकनीक और उससे जुड़े उपकरणों का निर्माण बढ़ाना है। इससे रेलवे के लिए आवश्यक उन्नत तकनीक के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। साथ ही विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट को लंबी दूरी के यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इनमें तेज गति के साथ सुरक्षा, विश्वसनीयता और निरंतर परिचालन क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्लीपर ट्रेनसेट के जरिए लंबी दूरी की रेल यात्रा को अधिक सुविधाजनक और तेज बनाने की रेलवे की योजना है।

जबलपुर सीपीआरओ डॉ. मधुर वर्मा ने बताया कि रेलवे की योजना आधुनिक स्लीपर ट्रेनसेट के माध्यम से लंबी दूरी की यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने की है। इन ट्रेनसेट में सुरक्षा, विश्वसनीयता और लगातार परिचालन क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी।

भेल भोपाल में तैयारियां शुरू
भेल भोपाल के जनसंपर्क अधिकारी उपेन्द्र सिंह ने बताया कि परियोजना को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भेल अपनी सहयोगी इकाइयों और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स के साथ समन्वय कर इस परियोजना पर काम करेगी। उन्होंने बताया कि भोपाल यूनिट को मोटर, ट्रांसफार्मर और कन्वर्टर जैसे महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है।

80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट की इस परियोजना से भोपाल की औद्योगिक पहचान को भी आधुनिक रेल निर्माण से जोड़ने का अवसर मिलेगा। ट्रेनसेट निर्माण के साथ 35 वर्षों के रखरखाव की व्यवस्था होने से यह परियोजना लंबे समय तक तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों का आधार बनी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *