भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कुशवाहा समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए अपने पुराने बयान पर खेद जताया है। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके एक बयान को लेकर कुशवाहा समाज में नाराजगी की चर्चा रही थी। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस विवाद का असर उपचुनाव के नतीजों पर भी पड़ा। हार के बाद भाजपा ने दतिया जिला इकाई को भी भंग कर दिया था।
पत्र जारी कर जताया खेद
बुधवार को जारी एक लिखित संदेश में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वह जीवनभर कुशवाहा समाज का सम्मान करते रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने लिखा कि वह सपने में भी इस समाज का अपमान करने की कल्पना नहीं कर सकते। यदि उनके किसी शब्द से समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उन शब्दों को वापस लेते हैं और इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।
तोमर ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कुछ दिन पहले भाजपा नेता कमलेश कुशवाहा के घर आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि भाजपा और कुशवाहा समाज एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मंशा किसी का अपमान करने की नहीं थी।
किस बयान पर हुआ था विवाद?
विवाद की शुरुआत मुरैना में भाजपा जिलाध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम से हुई थी। वहां नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि जब अन्य राजनीतिक दल अस्तित्व में भी नहीं थे, तब भाजपा ने कुशवाहा समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया था। इसी दौरान उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि समय-समय पर कुशवाहा समाज “इधर-उधर गुलाटियां खाता रहा”, जिससे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इसी बयान को लेकर विपक्ष और कुशवाहा समाज के कुछ संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस ने बनाया था चुनावी मुद्दा
दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने इस बयान को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी समाज के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने तोमर पर ओबीसी समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की थी।
भाजपा के आंतरिक आकलन में भी उठा मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के आंतरिक समीक्षा में भी यह माना गया कि विवादित बयान का चुनावी असर पड़ा हो सकता है। दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुशवाहा समाज को प्रभावशाली ओबीसी वर्ग माना जाता है और उसका वोट प्रतिशत करीब 12 फीसदी बताया जाता है।
उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने लगभग 6,016 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि कुशवाहा समाज के वोटों में मामूली भी बदलाव हुआ, तो उसने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक माफीनामे के जरिए भाजपा आगामी चुनावों से पहले कुशवाहा समाज के साथ रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की कोशिश कर रही है।
े पुराने बयान पर खेद जताया है। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके एक बयान को लेकर कुशवाहा समाज में नाराजगी की चर्चा रही थी। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस विवाद का असर उपचुनाव के नतीजों पर भी पड़ा। हार के बाद भाजपा ने दतिया जिला इकाई को भी भंग कर दिया था।
पत्र जारी कर जताया खेद
बुधवार को जारी एक लिखित संदेश में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वह जीवनभर कुशवाहा समाज का सम्मान करते रहे हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने लिखा कि वह सपने में भी इस समाज का अपमान करने की कल्पना नहीं कर सकते। यदि उनके किसी शब्द से समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उन शब्दों को वापस लेते हैं और इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।
तोमर ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कुछ दिन पहले भाजपा नेता कमलेश कुशवाहा के घर आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि भाजपा और कुशवाहा समाज एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मंशा किसी का अपमान करने की नहीं थी।
किस बयान पर हुआ था विवाद?
विवाद की शुरुआत मुरैना में भाजपा जिलाध्यक्ष के आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम से हुई थी। वहां नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि जब अन्य राजनीतिक दल अस्तित्व में भी नहीं थे, तब भाजपा ने कुशवाहा समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया था। इसी दौरान उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि समय-समय पर कुशवाहा समाज “इधर-उधर गुलाटियां खाता रहा”, जिससे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई। इसी बयान को लेकर विपक्ष और कुशवाहा समाज के कुछ संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस ने बनाया था चुनावी मुद्दा
दतिया उपचुनाव के दौरान कांग्रेस ने इस बयान को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा था कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी समाज के बारे में ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने तोमर पर ओबीसी समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की थी।
भाजपा के आंतरिक आकलन में भी उठा मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के आंतरिक समीक्षा में भी यह माना गया कि विवादित बयान का चुनावी असर पड़ा हो सकता है। दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुशवाहा समाज को प्रभावशाली ओबीसी वर्ग माना जाता है और उसका वोट प्रतिशत करीब 12 फीसदी बताया जाता है।
उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने लगभग 6,016 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि कुशवाहा समाज के वोटों में मामूली भी बदलाव हुआ, तो उसने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया हो सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक माफीनामे के जरिए भाजपा आगामी चुनावों से पहले कुशवाहा समाज के साथ रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की कोशिश कर रही है।
