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बाकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की दावेदारी से महागठबंधन में बढ़ी खींचतान, कांग्रेस और आरजेडी के सुर अलग

नई दिल्ली। बिहार की बाकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जन सुराज पार्टी द्वारा अपने संस्थापक प्रशांत किशोर को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद महागठबंधन के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) इस सीट को लेकर अलग-अलग रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं।

प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से बाकीपुर सीट का मुकाबला और रोचक हो गया है। यह सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। ऐसे में विपक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के खिलाफ एकजुट रणनीति बनाने की है।

इसी बीच आरजेडी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस सीट पर किसी अन्य दल के उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय अपना प्रत्याशी उतारेगी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में आरजेडी को इस सीट पर करीब 44 हजार वोट मिले थे, इसलिए पार्टी स्वाभाविक रूप से यहां अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

दूसरी ओर कांग्रेस का रुख इससे अलग दिखाई दे रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता ऋषि मिश्रा का कहना है कि यदि विपक्ष का उद्देश्य बीजेपी को हराना है, तो सभी दलों को साझा उम्मीदवार पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशांत किशोर महागठबंधन के शीर्ष नेताओं से बातचीत करें। यदि सहमति बनती है, तो उन्हें विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में समर्थन देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

कांग्रेस का मानना है कि एकजुट विपक्ष चुनाव में वोटों के बंटवारे को रोक सकता है और बीजेपी के सामने अधिक प्रभावी चुनौती पेश कर सकता है। पार्टी का कहना है कि साझा रणनीति से चुनावी मुकाबला विपक्ष के पक्ष में जा सकता है।

हालांकि आरजेडी और कांग्रेस के अलग-अलग बयानों ने यह संकेत दे दिया है कि बाकीपुर उपचुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर फिलहाल एकमत नहीं है। जहां आरजेडी अपनी दावेदारी पर अडिग है, वहीं कांग्रेस विपक्षी एकता के पक्ष में तर्क दे रही है।

अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में महागठबंधन इस सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित करता है या फिर विपक्षी एकजुटता के तहत किसी साझा चेहरे पर सहमति बनाने की कोशिश करता है। प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी ने निश्चित रूप से इस उपचुनाव को बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बना दिया है।

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