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MP: जमीन खरीदी मामले में BJP ने किया CM मोहन यादव का बचाव… जानें क्या बोले नेता?

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) और उनके परिवार (Family) के द्वारा जमीनों की खरीद (Land deal) के मामले में बीजेपी का रिएक्शन आया है। बीजेपी (BJP) की आईटी सेल के संयोजक अमित मालवीय, मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मध्य प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने इन सभी आरोपों खारिज कर दिया।


बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद, बेमतलब और राजनीति से प्रेरित हैं। कांग्रेस ने इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला बोला था। बीजेपी इस बात पर चुप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार की 2021 से 2023 के बीच लैंड होल्डिंग दोगुनी हो गई, उस वक्त मोहन यादव मध्य प्रदेश की सरकार में मंत्री थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद 2024 से 2025 के बीच यह फिर से दोगुनी हो गई।

सीएम मोहन यादव और उनके परिवार के द्वारा जमीन खरीद को लेकर एक स्टोरी में बताया था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार ने ऐसे इलाकों में 168 एकड़ जमीन खरीदी है, जहां पर बड़े पैमाने पर हाईवे बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम चल रहा है।


स्टोरी में यह भी बताया गया था कि 13 दिसंबर, 2023 को जब मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उसके बाद से मुख्यमंत्री के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। यह जमीन कुल 168 एकड़ है और इसकी कीमत 45 करोड़ रुपये है।


खतौनी (स्वामित्व रिकॉर्ड) के अनुसार, ये जमीनें मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, उनके भाई नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा यादव, उनके बेटे अभय यादव तथा चचेरे भाई गोविंद यादव और नीलेश यादव के द्वारा खरीदी गईं।


अमित मालवीय ने क्या कहा?
गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की गई एक पोस्ट में अमित मालवीय ने कहा, ‘मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ विपक्ष और उसके सहयोगी इकोसिस्टम द्वारा चलाया जा रहा अभियान तथ्यों की कसौटी पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जिस रिपोर्ट के आधार पर आरोपों का पहाड़ खड़ा किया गया, उसी की बुनियाद खोखली साबित हुई है।’ मालवीय ने कहा, ‘विपक्ष का यह पूरा अभियान अब एक राजनीतिक विच-हंट से अधिक कुछ नहीं लगता शोर बहुत है, लेकिन सबूत नहीं; आरोप बहुत हैं, लेकिन तथ्य नहीं।’


अमित मालवीय ने लिखा है कि उज्जैन मास्टर प्लान मई 2023 में ही सार्वजनिक कर दिया गया था जबकि मोहन यादव दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बने। मालवीय ने आगे लिखा, ‘शहर के भविष्य के विकास, सड़क परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध थी। जब पूरी जानकारी जनता के सामने थी, तब किसी को “इनसाइडर” लाभ मिलने का प्रश्न ही नहीं उठता।’


एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोहन यादव की बहू शालिनी ने जून-जुलाई 2025 में उज्जैन के गांगेड़ी में उज्जैन-बड़नगर और उज्जैन-इंदौर हाईवे के जंक्शन के पास 10.35 एकड़ के 12 प्लॉट खरीदे। इसकी कुल कीमत 1.03 करोड़ रुपये में है।


सीएम यादव और उनकी पत्नी ने खरीदे तीन प्लॉट
श्री देवकॉन्स देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसमें मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा की क्रमशः 47.3 प्रतिशत और 25.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, दोनों ने दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच उज्जैन के सावरखेड़ी और कस्बा उज्जैन में कुल 2.6 एकड़ जमीन वाले तीन प्लॉट खरीदे। इनकी कुल कीमत 1.43 करोड़ रुपये है।


श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड ने सितंबर 2024 में उज्जैन के ढेडिया में सीएम मोहन यादव के चचेरे भाई नीलेश को कम से कम 12 एकड़ जमीन 6.01 करोड़ रुपये में बेची थी। नीलेश यादव इस जमीन पर सावरिया ब्रांड के तहत एक हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं।


यह भी सामने आया था कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट पहले से ही विचाराधीन थे लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव ने कई सड़क परियोजनाओं का ऐलान किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री बनने के बाद यादव के उनके परिवार ने उज्जैन में जो 168 एकड़ जमीन खरीदी, उसमें से करीब दो-तिहाई जमीन इन नई सड़क परियोजनाओं और हाईवे के आसपास है।


खबर में बताया गया था कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार ने 2021 से 2023 के बीच उज्जैन में कम से कम 85 एकड़ जमीन सीधे तौर पर या अपनी किसी रियल एस्टेट कंपनी के जरिये खरीदी थी। उस दौरान मोहन यादव मध्य प्रदेश की सरकार में शिक्षा मंत्री थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा के नाम पर क्रमशः 17 और 11 एकड़ जमीन है, इस बारे में यादव ने 2023 के चुनाव के शपथ पत्र में बताया था।


यादव ने 2017 में छोड़ दिया था निदेशक का पद- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
रिपोर्ट सामने आने के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार, तथ्यात्मक रूप से गलत और राजनीति से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा था कि सीएम यादव ने 2023 के विधानसभा चुनाव में दायर किए गए हलफनामे में अपने और अपनी पत्नी के नाम पर दर्ज सभी जमीनों के बारे में बताया था और इनमें तब से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा था कि यादव के बेटे वैभव यादव के स्वामित्व वाली 16 एकड़ जमीन, जो 2023 से पहले उनके पास थी, यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं बढ़ी है।


श्री सिद्धिविनायक देवकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड के बारे में खंडेलवाल ने कहा था कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान इस कंपनी के पास लगभग 68 एकड़ जमीन थी, जो अब घटकर लगभग 65 एकड़ रह गई है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का कंपनी के कामकाज से मौजूदा वक्त में कोई संबंध नहीं है क्योंकि उन्होंने 2017 में कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था।


जांच होनी चाहिए- पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह
मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस की जांच की मांग पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई जांच की मांग उठाता है, तो जांच होनी चाहिए। इसमें कोई आपत्ति नहीं है… मेरा मानना ​​है कि अगर संपत्तियां अवैध रूप से अर्जित की गई हैं, तो यह बात भी सामने आनी चाहिए।”

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