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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दो भालुओं की संदिग्ध मौत, प्रबंधन का कहना है कि आपसी संघर्ष है कारण

उमरिया, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर से वन्यजीवों की संदिग्ध मौतों के मामले में चर्चा का विषय बन गया है। यहां पर एक घटना के थमने के पहले ही दूसरी घटना सामने आ जाती है। ताजा मामला मानपुर बफर जोन के अंतर्गत आने वाले खाम्हा बीट से संबंधित है, जहां दो भालुओं के शव मिलने से हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी को वन गश्ती के दौरान कक्ष क्रमांक पीएफ-275 में एक अवयस्क नर भालू का शव बरामद हुआ। इसी समय, डॉग स्क्वाड द्वारा की गई तलाशी में लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर कक्ष क्रमांक पीएफ-276 में एक मादा भालू का शव भी मिला। वन विभाग ने दोनों शवों को सुरक्षित किया और प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि दोनों भालुओं के सभी अवयव सुरक्षित थे।

इस मामले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने कहा कि जंगल गश्त के दौरान लगभग डेढ़ वर्ष आयु के नर भालू का शव देखा गया, जिसकी सूचना तत्काल विभाग को दी गई। मौके पर पहुंची टीम ने डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के क्षेत्र की तलाशी ली, और लगभग छह वर्ष आयु की मादा भालू का शव भी बरामद किया।

देर शाम होने के कारण उसी दिन कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते शनिवार को दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया और नियमानुसार अंतिम संस्कार किया गया। प्रारंभिक जांच में दोनों भालुओं की मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया जा रहा है, पूरी जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अब तक हुई अधिकांश वन्यजीवों की मौतों को प्रबंधन द्वारा आपसी संघर्ष के परिणाम के रूप में बताया जाता रहा है। कई बार जानवर लड़ते-लड़ते एक से डेढ़ किलोमीटर तक का फासला तय कर लेते हैं, हालांकि यह सवाल भी उठता है कि अब तक हुए कई पोस्टमार्टम मामलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हो पाई।

इन घटनाओं ने वन्यजीव प्रेमियों में गहरा आघात और चिंता का माहौल बना दिया है, वहीं पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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