
रीवा, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। मध्य प्रदेश का विन्ध्य क्षेत्र प्राचीन मंदिरों और कलाकृतियों से संपन्न है। यहाँ कई शैव और जैन मंदिर दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र शैव कालीन, राजपूत कालीन, और कल्चुरि कालीन स्थापत्य कला की धारणा करता है। गुढ़ के नजदीक स्थित खामडीह गांव में भैरवनाथ बाबा की प्रतिमा, जो भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की सबसे बड़ी मूर्तियों में से एक मानी जाती है, प्राचीन मूर्तिकला का अद्वितीय उदाहरण है।
इस अद्भुत मूर्ति का आकार 8.5 मीटर लंबा और 3.7 मीटर चौड़ा है, जो वर्षों से कैमोर पर्वत माला के गोद में खुले में स्थित थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आज शनिवार को इस मूर्ति और उसके साथ बने नए मंदिर का लोकार्पण किया जाएगा, जिसमें दो मंजिला भव्य मंदिर और अन्य संरचनाएँ शामिल हैं।
जनसम्पर्क अधिकारी उमेश तिवारी ने जानकारी दी कि भैरवनाथ की यह महान प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य कल्चुरि काल में बनाई गई थी। यह एक ही पत्थर को तराश कर तैयार की गई है और इसे काले रंग के बलुआ पत्थर से बनाया गया है। भैरवनाथ के चेहरे पर रौद्र रूप की उपस्थिति होने के बावजूद असीम शांति देखने को मिलती है। मूर्ति चतुर्भुज रूप में है, जिसमें दाहिने हाथ में त्रिशूल, निचले दाहिने हाथ में रूद्राक्ष माला, ऊपरी बाएं हाथ में तीन शीष वाले सर्प और बाएं हाथ में बीज और फल हैं, जो जीवन की उर्वरता और सृजनात्मकता का प्रतीक है।
इस भव्य प्रतिमा के सिर पर एक अद्भुत मुकुट सज रहा है, और यह कुंडल, अनेक हार, और यज्ञोपवीत से अलंकृत है। इस समारोह में चार परिचारिकाएँ भी हैं, जिनमें से दो बैठी और दो खड़ी मुद्रा में हैं। यह प्रतिमा हजारों लोगों के आस्था का केंद्र बनी हुई है, जहाँ लोग रोग निवारण, भय दूर करने और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए पूजा करते हैं। मंदिर के चारों ओर पथरीला ढालू क्षेत्र है, और इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
