
नई दिल्ली, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)।
लेखक: LN Star News
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) द्वारा विकसित राष्ट्रीय आईईडी डेटा प्रबंधन प्रणाली (एनआईडीएमएस) का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह प्रणाली देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगी। यह एआई-सक्षम राष्ट्रीय मंच देशभर से तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी) से संबंधित डेटा को एकत्रित कर उसका विश्लेषण करेगा और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करेगा।
अमित शाह ने इस मौके पर एनएसजी की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन देश की आंतरिक सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ है। इसकी वीरता, अद्वितीय कौशल और समर्पण के कारण ही देशवासी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनआईडीएमएस के माध्यम से विस्फोटकों से जुड़ी आतंकी घटनाओं के विश्लेषण, रोकथाम और प्रभावी जवाबी कार्रवाई में देश को एक नया सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
गृह मंत्री अमित शाह ने एनआईडीएमएस के लोकार्पण को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि देश में विस्फोटकों के उपयोग से जुड़ी सभी आतंकी घटनाओं के विश्लेषण में यह प्रणाली अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि यह मंच ऐसे खतरों से निपटने और प्रभावी बचाव उपाय विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अमित शाह ने एनएसजी को भारत की विश्वस्तरीय जीरो-एरर फोर्स बताया। उन्होंने कहा कि 1984 में अपनी स्थापना के बाद से, एनएसजी ने दुनियाभर की आतंकी घटनाओं का लगातार अध्ययन कर स्वयं को हर प्रकार की चुनौती के लिए तैयार किया है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप, एनएसजी भी स्वयं को लगातार उन्नत कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद और अब अयोध्या में भी एनएसजी हब विकसित किए जा रहे हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में एनएसजी डेढ़ घंटे के भीतर देश के किसी भी हिस्से में पहुंच सकेगी।
एनएसजी के अनुसार, एनआईडीएमएस राष्ट्रीय बम डेटा केंद्र (एनबीडीसी) का एक अभिन्न अंग है। यह प्रणाली देशभर में हुई आईईडी और अन्य विस्फोटक घटनाओं से संबंधित सूचनाओं को एक साझा डिजिटल भंडार के रूप में संग्रहित करेगी। इससे एनआईए, राज्य पुलिस बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य जांच एवं आतंकवाद निरोधक एजेंसियों को ऑनलाइन और दो-तरफा डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
एनआईडीएमएस के माध्यम से, अलग-अलग मामलों की फाइलों में बिखरे आंकड़े अब महज एक क्लिक पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध हो जाएंगे। यह मंच विभिन्न बम विस्फोटों के बीच ‘सिग्नेचर लिंक’ की पहचान करने, घटनाओं के पैटर्न और रुझानों का विश्लेषण करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए रणनीति तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा।
सरकार का मानना है कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म समय के साथ और अधिक उन्नत होता जाएगा, जिससे भारत की आईईडी निरोधक क्षमता, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद एवं उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई को नई मजबूती मिलेगी।
