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आईपैक पर छापेमारी मामला : तृणमूल कांग्रेस ने किया हाई कोर्ट का रुख, जब्त दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक की मांग

कोलकाता, 09 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)।
लेखक: LN Star News
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परामर्श संस्था इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सत्तारूढ़ दल ने अदालत से अनुरोध किया है कि तलाशी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा के दुरुपयोग और प्रसार पर तत्काल रोक लगाई जाए।

याचिका में तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उपयोग से जुड़े संवेदनशील और गोपनीय राजनीतिक डाटा को जब्त किया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई मनमानी, दुर्भावनापूर्ण तथा अधिकारों के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

याचिका के अनुसार, 8 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई थी। वहीं, ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई कथित कई करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले की जांच का अहम हिस्सा है।

तृणमूल कांग्रेस ने अदालत को सूचित किया कि जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डाटा में चुनावी अभियान की रणनीति, आंतरिक आकलन, शोध से जुड़ी सामग्री, संगठनात्मक समन्वय और मतदाता सूची से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं, जिनका किसी भी अनुसूचित अपराध या कथित अपराध से अर्जित धन से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि जांच के बहाने यह कार्रवाई अवैध रूप से पार्टी की चुनावी योजना, अभियान प्रबंधन और राजनीतिक रणनीति तक पहुंच बनाने के सुनियोजित उद्देश्य से की गई है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को बाधित किया जा सके। तृणमूल कांग्रेस का यह भी कहना है कि इस तरह की लक्षित जब्ती संविधान के तहत निजता के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जब्त डाटा के दुरुपयोग और प्रसार पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी तथा अंततः संवैधानिक लोकतंत्र कमजोर होगा। इसी गंभीर आधार पर पार्टी ने उच्च न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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