‘टॉक्सिक’ मूवी रिव्यू: यश का स्वैग, शानदार एक्शन और स्टाइलिश दुनिया ने जीता दिल
यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' बड़े पर्दे पर एक ऐसी गैंगस्टर कहानी लेकर आती है, जो अपने स्टाइल, विजुअल ट्रीटमेंट और एक्शन के कारण शुरुआत से ही अलग नजर आती है। निर्देशक गीतू मोहनदास ने फिल्म को पारंपरिक गैंगस्टर ड्रामा की तरह पेश करने के बजाय अपनी एक अलग दुनिया रची है, जहां अपराध, सत्ता, परिवार, रिश्ते और बदले की भावना एक-दूसरे से जुड़ते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस है, जो शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है।
'टॉक्सिक' की कहानी अपराध की दुनिया से जुड़े एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी सिर्फ गैंगस्टर की दुनिया तक सीमित नहीं है। फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट के किरदारों के जरिए कहानी परिवार, रिश्तों, सत्ता और वफादारी की कई परतों को सामने लाती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, अपराध की दुनिया में चल रहे ताकत के खेल के साथ...









