विदेशी फंडिंग का आरोप : सनसनी से नहीं, सबूतों से तय होनी चाहिए सच्चाई
सौरभ वाष्र्णेयबिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाना लोकतंत्र, राजनीतिक विमर्श और सार्वजनिक विश्वसनीयता के लिए कितना उचित? यह सवाल अपने आप में ही प्रश्रचिन्ह लगा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी देश के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। दुनिया के अनेक देशों में राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी प्रक्रियाओं और जन आंदोलनों पर बाहरी प्रभाव को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन किसी आशंका को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना और किसी राजनीतिक दल पर विदेशी धन लेकर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाना दो अलग-अलग बातें हैं। यही अंतर जिम्मेदार पत्रकारिता, निष्पक्ष राजनीतिक विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद है।हाल ही में अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन के नाम से सोशल मीडिया के जरिये सामने आए एक बयान में भारत में सक्रिय एक राजनीतिक दल को अम...









