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Tag: हस्तशिल्प

200 साल पुरानी परंपरा को संजो रहा मुस्लिम परिवार, कूचबिहार में चौथी पीढ़ी के अमिनुर बना रहे 34 फीट का रास चक्र

200 साल पुरानी परंपरा को संजो रहा मुस्लिम परिवार, कूचबिहार में चौथी पीढ़ी के अमिनुर बना रहे 34 फीट का रास चक्र

लोक रुचि
कूचबिहार, 25 अक्टूबर (प्रेस ब्यूरो)। कूचबिहार के हरिणचौड़ा इलाके में स्थित तोर्सा नदी के किनारे बसे एक मुस्लिम परिवार ने 200 साल से अधिक पुरानी परम्परा के तहत 34 फीट ऊँचा रास चक्र बनाना जारी रखा है। इस वर्ष इस जिम्मेदारी को चौथी पीढ़ी के अमिनुर हुसैन ने संभाला है। अमिनुर अपने घर में बांस, कागज, गोंद और धागे की मदद से रास चक्र का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी पूजा के दिन से ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और इस प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लगेगा। देवत्र ट्रस्ट बोर्ड के अनुसार, 24 नवंबर को मदनमोहन मंदिर में रास उत्सव का शुभारम्भ होगा। रात 9 बजे जिलाधिकारी एवं देवत्र ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष इस बड़े रास चक्र को घुमा कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत करेंगे। ऐतिहासिक रूप से, महाराजा हरेंद्र नारायण के शासनकाल में 200 साल से पहले भेटागुड़ी में इस उत्सव की शुरुआत ...
सूरजकुंड शिल्प मेला: वसुधैव कुटुंबकम का प्रतीक, उपराष्ट्रपति का उद्घाटन

सूरजकुंड शिल्प मेला: वसुधैव कुटुंबकम का प्रतीक, उपराष्ट्रपति का उद्घाटन

राष्ट्रीय
फरीदाबाद, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। इस समारोह में उन्होंने कहा कि यह मेला भारतीय सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को जीवंत करता है। उपराष्ट्रपति के अनुसार, यह मेला कारीगरों और लोक कलाकारों को एक साझा मंच पर लाकर उनकी पहचान को और प्रगाढ़ करता है। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले चार दशकों में यह मेला विभिन्न कलाओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष का आयोजन आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जिससे कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मेघालय के सहभागिता की सराहना की, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक हैं। इस अवसर ...
पुरुलिया खादी मेला: बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक स्वादों का संगम

पुरुलिया खादी मेला: बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक स्वादों का संगम

विशेष समाचार
पुरुलिया, 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल खादी एवं ग्रामीण उद्योग बोर्ड के तत्वावधान में पुरुलिया शहर के जीईएल चर्च मैदान में आयोजित 'जिला खादी मेला' इन दिनों स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में राज्य के विभिन्न कोनों से आए खादी वस्त्र, दुर्लभ हस्तशिल्प और पारंपरिक पीठे-पुलियों (बंगाली मिठाइयां) की महक ने पूरे परिसर को उत्सव के माहौल में सराबोर कर दिया है। मेले में इस वर्ष पंजाबी कुर्ते, जवाहर कोट से लेकर स्वर्णलता और पशमीना जैसी उत्कृष्ट साड़ियों की विशाल श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। यहां न केवल वस्त्र, बल्कि उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी का बेंत फर्नीचर, कूचबिहार की प्रसिद्ध शीतलपाटी और मेदिनीपुर के पारंपरिक पटचित्र भी उपलब्ध हैं। मोहनीगंज का प्रसिद्ध तुलाईपांजी चावल और सुंदरबन का शुद्ध शहद भी ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मेले ...
100 बेलमेटल हस्तशिल्पकारों को टूलकिट वितरण, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

100 बेलमेटल हस्तशिल्पकारों को टूलकिट वितरण, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

छत्तीसगढ़, राज्य
जगदलपुर, 17 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। बस्तर जिला मुख्यालय में बेलमेटल (डोकरा) हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 100 बेलमेटल शिल्प कारीगरों को टूलकिट का वितरण शनिवार को किया गया। यह कार्यक्रम वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से आयोजित किया गया, जिसे बस्तर शिल्प हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया गया। टूलकिट वितरण से बेलमेटल शिल्प से जुड़े कारीगरों को आधुनिक एवं आवश्यक औजार प्राप्त हुए हैं, जिससे उनके कार्य में आसानी होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और आय में सुधार होगा। यह कार्यक्रम बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प के संरक्षण के साथ-साथ उसे आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त और सकारात्मक पहल है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बेलमेटल हस्तशिल्पकार एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बस्तर ...