
फरीदाबाद, 01 फरवरी (प्रेस ब्यूरो)। 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया। इस समारोह में उन्होंने कहा कि यह मेला भारतीय सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को जीवंत करता है। उपराष्ट्रपति के अनुसार, यह मेला कारीगरों और लोक कलाकारों को एक साझा मंच पर लाकर उनकी पहचान को और प्रगाढ़ करता है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बताया कि पिछले चार दशकों में यह मेला विभिन्न कलाओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष का आयोजन आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जिससे कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और मेघालय के सहभागिता की सराहना की, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला प्राचीन विरासत और आधुनिकता का संगम है। उपराष्ट्रपति ने मेले के दौरान विभिन्न पवेलियनों का दौरा किया और कलाकारों से संवाद किया, जिससे उन्होंने उनकी कुशलता की सराहना की। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित अन्य कई प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही।
