Friday, March 6खबर जो असर करे |
Shadow

पुरुलिया खादी मेला: बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक स्वादों का संगम

पुरुलिया, 18 जनवरी (प्रेस ब्यूरो)। पश्चिम बंगाल खादी एवं ग्रामीण उद्योग बोर्ड के तत्वावधान में पुरुलिया शहर के जीईएल चर्च मैदान में आयोजित ‘जिला खादी मेला’ इन दिनों स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में राज्य के विभिन्न कोनों से आए खादी वस्त्र, दुर्लभ हस्तशिल्प और पारंपरिक पीठे-पुलियों (बंगाली मिठाइयां) की महक ने पूरे परिसर को उत्सव के माहौल में सराबोर कर दिया है।

मेले में इस वर्ष पंजाबी कुर्ते, जवाहर कोट से लेकर स्वर्णलता और पशमीना जैसी उत्कृष्ट साड़ियों की विशाल श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। यहां न केवल वस्त्र, बल्कि उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी का बेंत फर्नीचर, कूचबिहार की प्रसिद्ध शीतलपाटी और मेदिनीपुर के पारंपरिक पटचित्र भी उपलब्ध हैं। मोहनीगंज का प्रसिद्ध तुलाईपांजी चावल और सुंदरबन का शुद्ध शहद भी ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

मेले में शामिल चित्रकार केशिना ने बताया कि वे खादी के कपड़ों पर बंगाल के पारंपरिक पटचित्र उकेर रही हैं, जिसे ग्राहक काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं, कूचबिहार से आए शीतलपाटी कारीगर अनिल दे ने कहा, “पिछली बार मेरा सारा स्टॉक बिक गया था, इसलिए इस बार मैं अधिक सामान लाया हूं और बिक्री भी संतोषजनक है।” जलपाईगुड़ी के अनिल मातब्वर पहली बार बेंत के फर्नीचर के साथ यहां आए हैं और उन्हें स्थानीय लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

मेले का एक मुख्य आकर्षण नदिया जिले के कुशबेड़िया से आए अनिर्बान विश्वास का स्टॉल है, जहां बांग्लादेश के जेशोर की पारंपरिक शैली के पीठे परोसे जा रहे हैं। मेले में आई एक बुजुर्ग महिला अल्पना मैत्र ने भावुक होते हुए कहा, “आज के भागदौड़ भरे जीवन में घर पर पारंपरिक पीठे बनाना कम हो गया है। मैं अपनी बेटियों को यहां इसलिए लाई हूं ताकि वे हमारी जड़ों और इन पारंपरिक जायकों से परिचित हो सकें।”

जिला खादी विभाग के अधिकारी पापु मुखोपाध्याय के अनुसार, पिछले वर्ष इस मेले ने 1 करोड़ 80 लाख रुपये का कारोबार किया था। इस बार भीड़ और उत्साह को देखते हुए व्यापार के इस आंकड़े को पार करने की पूरी उम्मीद है। दस जनवरी से शुरू हुआ यह हस्तशिल्प और संस्कृति का यह अनूठा समागम आगामी 20 जनवरी तक जारी रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *